29 सितंबर 2027 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 29 सितंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 29 सितंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (08:25 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (01:30, 30 सित॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 11:24 से 12:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 17:23
रात 05:25 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 01:30 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 08:25 तक
अमावस्या 05:36, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 01:30, 30 सित॰ तक
हस्त 23:41, 30 सित॰ तक
योग
शुक्ल 21:56 तक
ब्रह्म 18:39, 30 सित॰ तक
करण
शकुनि 08:25 तक
चतुष्पद 18:59 तक
नाग 05:36, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 09:04 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
04:26
चंद्रास्त
16:44
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:48 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:24 – 12:53
यमगंड
06:54 – 08:24
गुलिक काल
09:54 – 11:24

29 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:25 – 06:54शुभ
अमृत06:54 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:54टालें
शुभ09:54 – 11:24शुभ
रोग11:24 – 12:53टालें
उद्वेग12:53 – 14:23टालें
चर14:23 – 15:53सामान्य
लाभ15:53 – 17:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:23 – 18:53टालें
शुभ18:53 – 20:23शुभ
अमृत20:23 – 21:54शुभ
चर21:54 – 23:24सामान्य
रोग23:24 – 00:54टालें
काल00:54 – 02:24टालें
लाभ02:24 – 03:55शुभ
उद्वेग03:55 – 05:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2506:24दिन
चंद्र06:2407:24दिन
शनि07:2408:24दिन
गुरु08:2409:24दिन
मंगल09:2410:24दिन
सूर्य10:2411:24दिन
शुक्र11:2412:23दिन
बुध12:2313:23दिन
चंद्र13:2314:23दिन
शनि14:2315:23दिन
गुरु15:2316:23दिन
मंगल16:2317:23दिन
सूर्य17:2318:23रात
शुक्र18:2319:23रात
बुध19:2320:23रात
चंद्र20:2321:23रात
शनि21:2322:24रात
गुरु22:2423:24रात
मंगल23:2400:24रात
सूर्य00:2401:24रात
शुक्र01:2402:24रात
बुध02:2403:25रात
चंद्र03:2504:25रात
शनि04:2505:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2446° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।