27 अक्टूबर 2027 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 27 अक्टूबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (20:20 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (10:31 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 16:56 पर है। राहुकाल 11:17 से 12:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 16:56
रात 05:38 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:20 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 10:31 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 20:20 तक
कृष्ण चतुर्दशी 18:18, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:06, 28 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 06:12 तक
वैधृतिअशुभ 03:15, 28 अक्टू॰ तक
विष्कंभअशुभ 00:31, 29 अक्टू॰ तक
करण
गर 09:26 तक
वणिज 20:20 तक
विष्टि (भद्रा) 07:17, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
16:56
चंद्रोदय
03:14
चंद्रास्त
15:16
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
10:54 – 11:40 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:17 – 12:42
यमगंड
07:03 – 08:27
गुलिक काल
09:52 – 11:17

27 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:38 – 07:03शुभ
अमृत07:03 – 08:27शुभ
काल08:27 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:17शुभ
रोग11:17 – 12:42टालें
उद्वेग12:42 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:32सामान्य
लाभ15:32 – 16:56शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:56 – 18:32टालें
शुभ18:32 – 20:07शुभ
अमृत20:07 – 21:42शुभ
चर21:42 – 23:17सामान्य
रोग23:17 – 00:53टालें
काल00:53 – 02:28टालें
लाभ02:28 – 04:03शुभ
उद्वेग04:03 – 05:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3806:34दिन
चंद्र06:3407:31दिन
शनि07:3108:27दिन
गुरु08:2709:24दिन
मंगल09:2410:21दिन
सूर्य10:2111:17दिन
शुक्र11:1712:14दिन
बुध12:1413:10दिन
चंद्र13:1014:07दिन
शनि14:0715:03दिन
गुरु15:0316:00दिन
मंगल16:0016:56दिन
सूर्य16:5618:00रात
शुक्र18:0019:03रात
बुध19:0320:07रात
चंद्र20:0721:10रात
शनि21:1022:14रात
गुरु22:1423:17रात
मंगल23:1700:21रात
सूर्य00:2101:24रात
शुक्र01:2402:28रात
बुध02:2803:31रात
चंद्र03:3104:35रात
शनि04:3505:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2457° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।