5 नवंबर 2027 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 5 नवंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 5 नवंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (21:39 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (15:49 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:43 पर और सूर्यास्त 16:50 पर है। राहुकाल 09:53 से 11:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:43 – 16:50
रात 05:44 तक
तिथि
सप्तमी, 21:39 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 15:49 तक
श्रवण
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 21:39 तक
शुक्ल अष्टमी 00:20, 7 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:56, 6 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 18:24 तक
गंडअशुभ 19:23, 6 नव॰ तक
करण
गर 08:21 तक
वणिज 21:39 तक
विष्टि (भद्रा) 11:00, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
16:50
चंद्रोदय
11:34
चंद्रास्त
22:38
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
09:53 – 11:17
यमगंड
14:04 – 15:27
गुलिक काल
07:07 – 08:30

5 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:43 – 07:07सामान्य
लाभ07:07 – 08:30शुभ
अमृत08:30 – 09:53शुभ
काल09:53 – 11:17टालें
शुभ11:17 – 12:40शुभ
रोग12:40 – 14:04टालें
उद्वेग14:04 – 15:27टालें
चर15:27 – 16:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:50 – 18:27टालें
काल18:27 – 20:04टालें
लाभ20:04 – 21:40शुभ
उद्वेग21:40 – 23:17टालें
शुभ23:17 – 00:54शुभ
अमृत00:54 – 02:31शुभ
चर02:31 – 04:07सामान्य
रोग04:07 – 05:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4306:39दिन
बुध06:3907:35दिन
चंद्र07:3508:30दिन
शनि08:3009:26दिन
गुरु09:2610:21दिन
मंगल10:2111:17दिन
सूर्य11:1712:12दिन
शुक्र12:1213:08दिन
बुध13:0814:04दिन
चंद्र14:0414:59दिन
शनि14:5915:55दिन
गुरु15:5516:50दिन
मंगल16:5017:55रात
सूर्य17:5518:59रात
शुक्र18:5920:04रात
बुध20:0421:08रात
चंद्र21:0822:13रात
शनि22:1323:17रात
गुरु23:1700:22रात
मंगल00:2201:26रात
सूर्य01:2602:31रात
शुक्र02:3103:35रात
बुध03:3504:40रात
चंद्र04:4005:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2460° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।