8 नवंबर 2027 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 8 नवंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 8 नवंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (05:05, 9 नव॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (00:44, 9 नव॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 16:49 पर है। राहुकाल 07:08 से 08:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 16:49
रात 05:46 तक
तिथि
दशमी, 05:05 तक
नक्षत्र
शतभिषा, 00:44 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:05, 9 नव॰ तक
शुक्ल एकादशी 06:41, 10 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 00:44, 9 नव॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:57, 10 नव॰ तक
योग
ध्रुव 21:02 तक
व्याघातअशुभ 21:21, 9 नव॰ तक
करण
तैतिल 16:03 तक
गर 05:05, 9 नव॰ तक
वणिज 17:58, 9 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
16:49
चंद्रोदय
13:12
चंद्रास्त
00:22
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
07:08 – 08:31
यमगंड
09:54 – 11:17
गुलिक काल
12:40 – 14:03

8 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:45 – 07:08शुभ
काल07:08 – 08:31टालें
शुभ08:31 – 09:54शुभ
रोग09:54 – 11:17टालें
उद्वेग11:17 – 12:40टालें
चर12:40 – 14:03सामान्य
लाभ14:03 – 15:26शुभ
अमृत15:26 – 16:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:49 – 18:26सामान्य
रोग18:26 – 20:03टालें
काल20:03 – 21:40टालें
लाभ21:40 – 23:17शुभ
उद्वेग23:17 – 00:54टालें
शुभ00:54 – 02:32शुभ
अमृत02:32 – 04:09शुभ
चर04:09 – 05:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4506:41दिन
शनि06:4107:36दिन
गुरु07:3608:31दिन
मंगल08:3109:26दिन
सूर्य09:2610:22दिन
शुक्र10:2211:17दिन
बुध11:1712:12दिन
चंद्र12:1213:07दिन
शनि13:0714:03दिन
गुरु14:0314:58दिन
मंगल14:5815:53दिन
सूर्य15:5316:49दिन
शुक्र16:4917:53रात
बुध17:5318:58रात
चंद्र18:5820:03रात
शनि20:0321:08रात
गुरु21:0822:13रात
मंगल22:1323:17रात
सूर्य23:1700:22रात
शुक्र00:2201:27रात
बुध01:2702:32रात
चंद्र02:3203:36रात
शनि03:3604:41रात
गुरु04:4105:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2461° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।