10 नवंबर 2027 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 10 नवंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 10 नवंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (06:41 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (04:31, 11 नव॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 16:48 पर है। राहुकाल 11:17 से 12:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 16:48
रात 05:47 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 04:31 तक
रेवती
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 06:41 तक
शुक्ल द्वादशी 07:37, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 04:31, 11 नव॰ तक
रेवती 05:25, 12 नव॰ तक
योग
हर्षण 21:10 तक
वज्रअशुभ 20:27, 11 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:41 तक
बव 19:14 तक
बालव 07:37, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
16:48
चंद्रोदय
14:12
चंद्रास्त
02:05
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:39 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:17 – 12:40
यमगंड
07:09 – 08:32
गुलिक काल
09:54 – 11:17

10 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:47 – 07:09शुभ
अमृत07:09 – 08:32शुभ
काल08:32 – 09:54टालें
शुभ09:54 – 11:17शुभ
रोग11:17 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:02टालें
चर14:02 – 15:25सामान्य
लाभ15:25 – 16:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:48 – 18:25टालें
शुभ18:25 – 20:03शुभ
अमृत20:03 – 21:40शुभ
चर21:40 – 23:17सामान्य
रोग23:17 – 00:55टालें
काल00:55 – 02:32टालें
लाभ02:32 – 04:10शुभ
उद्वेग04:10 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4706:42दिन
चंद्र06:4207:37दिन
शनि07:3708:32दिन
गुरु08:3209:27दिन
मंगल09:2710:22दिन
सूर्य10:2211:17दिन
शुक्र11:1712:12दिन
बुध12:1213:07दिन
चंद्र13:0714:02दिन
शनि14:0214:57दिन
गुरु14:5715:53दिन
मंगल15:5316:48दिन
सूर्य16:4817:53रात
शुक्र17:5318:58रात
बुध18:5820:03रात
चंद्र20:0321:07रात
शनि21:0722:12रात
गुरु22:1223:17रात
मंगल23:1700:22रात
सूर्य00:2201:27रात
शुक्र01:2702:32रात
बुध02:3203:37रात
चंद्र03:3704:42रात
शनि04:4205:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2462° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।