16 नवंबर 2027 को दोहा का पंचांग

मंगलवार, 16 नवंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

मंगलवार, 16 नवंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:12, 17 नव॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:12, 17 नव॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 16:45 पर है। राहुकाल 14:02 से 15:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 16:45
रात 05:51 तक
तिथि
तृतीया, 01:12 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:12 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:12, 17 नव॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 23:05, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:12, 17 नव॰ तक
आर्द्रा 00:48, 18 नव॰ तक
योग
शिव 10:09 तक
सिद्ध 07:18, 17 नव॰ तक
करण
वणिज 14:13 तक
विष्टि (भद्रा) 01:12, 17 नव॰ तक
बव 12:09, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:53 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
16:45
चंद्रोदय
18:42
चंद्रास्त
08:04
दिनमान
10h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
10:56 – 11:40

अशुभ समय

राहुकाल
14:02 – 15:23
यमगंड
08:34 – 09:56
गुलिक काल
11:18 – 12:40

16 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:51 – 07:13टालें
उद्वेग07:13 – 08:34टालें
चर08:34 – 09:56सामान्य
लाभ09:56 – 11:18शुभ
अमृत11:18 – 12:40शुभ
काल12:40 – 14:02टालें
शुभ14:02 – 15:23शुभ
रोग15:23 – 16:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:45 – 18:23टालें
लाभ18:23 – 20:02शुभ
उद्वेग20:02 – 21:40टालें
शुभ21:40 – 23:18शुभ
अमृत23:18 – 00:57शुभ
चर00:57 – 02:35सामान्य
रोग02:35 – 04:13टालें
काल04:13 – 05:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5106:45दिन
सूर्य06:4507:40दिन
शुक्र07:4008:34दिन
बुध08:3409:29दिन
चंद्र09:2910:23दिन
शनि10:2311:18दिन
गुरु11:1812:12दिन
मंगल12:1213:07दिन
सूर्य13:0714:02दिन
शुक्र14:0214:56दिन
बुध14:5615:51दिन
चंद्र15:5116:45दिन
शनि16:4517:51रात
गुरु17:5118:56रात
मंगल18:5620:02रात
सूर्य20:0221:07रात
शुक्र21:0722:13रात
बुध22:1323:18रात
चंद्र23:1800:24रात
शनि00:2401:29रात
गुरु01:2902:35रात
मंगल02:3503:40रात
सूर्य03:4004:46रात
शुक्र04:4605:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2464° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।