12 अक्टूबर 2028 को दोहा का पंचांग

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (00:53, 13 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (06:41 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:09 पर है। राहुकाल 12:47 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:09
रात 05:31 तक
तिथि
नवमी, 00:53 तक
दशमी
नक्षत्र
पुष्य
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 00:53, 13 अक्टू॰ तक
कृष्ण दशमी 22:43, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 05:44, 13 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 01:25, 13 अक्टू॰ तक
साध्य 22:30, 13 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 13:44 तक
गर 00:53, 13 अक्टू॰ तक
वणिज 11:53, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:09
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:56
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
10:56 – 11:43

अशुभ समय

राहुकाल
12:47 – 14:14
यमगंड
05:30 – 06:58
गुलिक काल
08:25 – 09:52

12 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:30 – 06:58शुभ
रोग06:58 – 08:25टालें
उद्वेग08:25 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:20सामान्य
लाभ11:20 – 12:47शुभ
अमृत12:47 – 14:14शुभ
काल14:14 – 15:41टालें
शुभ15:41 – 17:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:09 – 18:41शुभ
चर18:41 – 20:14सामान्य
रोग20:14 – 21:47टालें
काल21:47 – 23:20टालें
लाभ23:20 – 00:53शुभ
उद्वेग00:53 – 02:25टालें
शुभ02:25 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3006:29दिन
मंगल06:2907:27दिन
सूर्य07:2708:25दिन
शुक्र08:2509:23दिन
बुध09:2310:21दिन
चंद्र10:2111:20दिन
शनि11:2012:18दिन
गुरु12:1813:16दिन
मंगल13:1614:14दिन
सूर्य14:1415:12दिन
शुक्र15:1216:11दिन
बुध16:1117:09दिन
चंद्र17:0918:11रात
शनि18:1119:12रात
गुरु19:1220:14रात
मंगल20:1421:16रात
सूर्य21:1622:18रात
शुक्र22:1823:20रात
बुध23:2000:22रात
चंद्र00:2201:24रात
शनि01:2402:25रात
गुरु02:2503:27रात
मंगल03:2704:29रात
सूर्य04:2905:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2591° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।