30 दिसंबर 2028 को दोहा का पंचांग

शनिवार, 30 दिसंबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शनिवार, 30 दिसंबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (20:44 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:46, 31 दिस॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 16:54 पर है। राहुकाल 08:57 से 10:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 16:54
रात 06:19 तक
तिथि
चतुर्दशी, 20:44 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:46 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 20:44 तक
पूर्णिमा 19:48, 31 दिस॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:46, 31 दिस॰ तक
आर्द्रा 02:20, 1 जन॰ तक
योग
शुक्ल 23:04 तक
ब्रह्म 21:04, 31 दिस॰ तक
करण
गर 09:00 तक
वणिज 20:44 तक
विष्टि (भद्रा) 08:20, 31 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:47 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
16:54
चंद्रोदय
15:42
चंद्रास्त
04:59
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:57 – 10:17
यमगंड
12:56 – 14:15
गुलिक काल
06:18 – 07:38

30 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:18 – 07:38टालें
शुभ07:38 – 08:57शुभ
रोग08:57 – 10:17टालें
उद्वेग10:17 – 11:36टालें
चर11:36 – 12:56सामान्य
लाभ12:56 – 14:15शुभ
अमृत14:15 – 15:34शुभ
काल15:34 – 16:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:54 – 18:34शुभ
उद्वेग18:34 – 20:15टालें
शुभ20:15 – 21:56शुभ
अमृत21:56 – 23:36शुभ
चर23:36 – 01:17सामान्य
रोग01:17 – 02:58टालें
काल02:58 – 04:38टालें
लाभ04:38 – 06:19शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1807:11दिन
गुरु07:1108:04दिन
मंगल08:0408:57दिन
सूर्य08:5709:50दिन
शुक्र09:5010:43दिन
बुध10:4311:36दिन
चंद्र11:3612:29दिन
शनि12:2913:22दिन
गुरु13:2214:15दिन
मंगल14:1515:08दिन
सूर्य15:0816:01दिन
शुक्र16:0116:54दिन
बुध16:5418:01रात
चंद्र18:0119:08रात
शनि19:0820:15रात
गुरु20:1521:22रात
मंगल21:2222:29रात
सूर्य22:2923:36रात
शुक्र23:3600:43रात
बुध00:4301:50रात
चंद्र01:5002:58रात
शनि02:5804:05रात
गुरु04:0505:12रात
मंगल05:1206:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2621° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।