2 अक्टूबर 2029 को दोहा का पंचांग

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (12:38 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (12:52 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 14:21 से 15:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:19
रात 05:26 तक
तिथि
नवमी, 12:38 तक
दशमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 12:52 तक
पुष्य
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 12:38 तक
कृष्ण दशमी 12:01, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 12:54, 3 अक्टू॰ तक
योग
शिव 02:35, 3 अक्टू॰ तक
सिद्ध 00:34, 4 अक्टू॰ तक
करण
गर 12:38 तक
वणिज 00:26, 3 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:01, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 06:43 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:21
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
14:21 – 15:50
यमगंड
08:24 – 09:53
गुलिक काल
11:22 – 12:52

2 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:26 – 06:55टालें
उद्वेग06:55 – 08:24टालें
चर08:24 – 09:53सामान्य
लाभ09:53 – 11:22शुभ
अमृत11:22 – 12:52शुभ
काल12:52 – 14:21टालें
शुभ14:21 – 15:50शुभ
रोग15:50 – 17:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:19 – 18:50टालें
लाभ18:50 – 20:21शुभ
उद्वेग20:21 – 21:52टालें
शुभ21:52 – 23:23शुभ
अमृत23:23 – 00:54शुभ
चर00:54 – 02:25सामान्य
रोग02:25 – 03:55टालें
काल03:55 – 05:26टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2606:25दिन
सूर्य06:2507:25दिन
शुक्र07:2508:24दिन
बुध08:2409:24दिन
चंद्र09:2410:23दिन
शनि10:2311:22दिन
गुरु11:2212:22दिन
मंगल12:2213:21दिन
सूर्य13:2114:21दिन
शुक्र14:2115:20दिन
बुध15:2016:20दिन
चंद्र16:2017:19दिन
शनि17:1918:20रात
गुरु18:2019:20रात
मंगल19:2020:21रात
सूर्य20:2121:21रात
शुक्र21:2122:22रात
बुध22:2223:23रात
चंद्र23:2300:23रात
शनि00:2301:24रात
गुरु01:2402:25रात
मंगल02:2503:25रात
सूर्य03:2504:26रात
शुक्र04:2605:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2727° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।