21 अक्टूबर 2029 को दोहा का पंचांग

रविवार, 21 अक्टूबर 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 21 अक्टूबर 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (10:02 तक), नक्षत्र रेवती (02:22, 22 अक्टू॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 15:35 से 17:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:01
रात 05:35 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:02 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
रेवती, 02:22 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:02 तक
पूर्णिमा 12:27, 22 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 02:22, 22 अक्टू॰ तक
अश्विनी 05:21, 23 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 06:16, 22 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 10:02 तक
विष्टि (भद्रा) 23:13 तक
बव 12:27, 22 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मीन 02:22, 22 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
16:14
चंद्रास्त
04:34
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:41

अशुभ समय

राहुकाल
15:35 – 17:01
यमगंड
11:18 – 12:44
गुलिक काल
14:09 – 15:35

21 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:35 – 07:01टालें
चर07:01 – 08:26सामान्य
लाभ08:26 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:18शुभ
काल11:18 – 12:44टालें
शुभ12:44 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:35टालें
उद्वेग15:35 – 17:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:01 – 18:35शुभ
अमृत18:35 – 20:09शुभ
चर20:09 – 21:44सामान्य
रोग21:44 – 23:18टालें
काल23:18 – 00:52टालें
लाभ00:52 – 02:27शुभ
उद्वेग02:27 – 04:01टालें
शुभ04:01 – 05:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3506:32दिन
शुक्र06:3207:29दिन
बुध07:2908:26दिन
चंद्र08:2609:23दिन
शनि09:2310:21दिन
गुरु10:2111:18दिन
मंगल11:1812:15दिन
सूर्य12:1513:12दिन
शुक्र13:1214:09दिन
बुध14:0915:06दिन
चंद्र15:0616:04दिन
शनि16:0417:01दिन
गुरु17:0118:04रात
मंगल18:0419:07रात
सूर्य19:0720:09रात
शुक्र20:0921:12रात
बुध21:1222:15रात
चंद्र22:1523:18रात
शनि23:1800:21रात
गुरु00:2101:24रात
मंगल01:2402:27रात
सूर्य02:2703:30रात
शुक्र03:3004:32रात
बुध04:3205:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2734° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।