23 अक्टूबर 2029 को दोहा का पंचांग

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2029, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2029 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (15:00 तक), नक्षत्र भरणी (08:23, 24 अक्टू॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 16:59
रात 05:36 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:00 तक
द्वितीया
नक्षत्र
भरणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 15:00 तक
कृष्ण द्वितीया 17:34, 24 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 08:23, 24 अक्टू॰ तक
योग
वज्रअशुभ 07:10 तक
सिद्धि 08:07, 24 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 15:00 तक
तैतिल 04:17, 24 अक्टू॰ तक
गर 17:34, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
17:27
चंद्रास्त
06:18
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:40

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:34
यमगंड
08:27 – 09:52
गुलिक काल
11:18 – 12:43

23 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:36 – 07:01टालें
उद्वेग07:01 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:52सामान्य
लाभ09:52 – 11:18शुभ
अमृत11:18 – 12:43शुभ
काल12:43 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 16:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:59 – 18:34टालें
लाभ18:34 – 20:08शुभ
उद्वेग20:08 – 21:43टालें
शुभ21:43 – 23:18शुभ
अमृत23:18 – 00:52शुभ
चर00:52 – 02:27सामान्य
रोग02:27 – 04:02टालें
काल04:02 – 05:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3606:33दिन
सूर्य06:3307:30दिन
शुक्र07:3008:27दिन
बुध08:2709:24दिन
चंद्र09:2410:21दिन
शनि10:2111:18दिन
गुरु11:1812:14दिन
मंगल12:1413:11दिन
सूर्य13:1114:08दिन
शुक्र14:0815:05दिन
बुध15:0516:02दिन
चंद्र16:0216:59दिन
शनि16:5918:02रात
गुरु18:0219:05रात
मंगल19:0520:08रात
सूर्य20:0821:12रात
शुक्र21:1222:15रात
बुध22:1523:18रात
चंद्र23:1800:21रात
शनि00:2101:24रात
गुरु01:2402:27रात
मंगल02:2703:30रात
सूर्य03:3004:33रात
शुक्र04:3305:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2735° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।