3 फ़रवरी 2025 को दुबई का पंचांग

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (03:07, 4 फ़र॰ तक), नक्षत्र रेवती (21:46 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 18:04
रात 07:00 तक
तिथि
षष्ठी, 03:07 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रेवती, 21:46 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 03:07, 4 फ़र॰ तक
शुक्ल सप्तमी 01:01, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 21:46 तक
अश्विनी 20:19, 4 फ़र॰ तक
योग
साध्य 01:32, 4 फ़र॰ तक
शुभ 22:36, 4 फ़र॰ तक
करण
कौलव 16:14 तक
तैतिल 03:07, 4 फ़र॰ तक
गर 14:03, 4 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 21:46 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
10:10
चंद्रास्त
23:13
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:46
यमगंड
11:09 – 12:32
गुलिक काल
13:55 – 15:18

3 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:00 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:46टालें
शुभ09:46 – 11:09शुभ
रोग11:09 – 12:32टालें
उद्वेग12:32 – 13:55टालें
चर13:55 – 15:18सामान्य
लाभ15:18 – 16:41शुभ
अमृत16:41 – 18:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:04 – 19:41सामान्य
रोग19:41 – 21:18टालें
काल21:18 – 22:55टालें
लाभ22:55 – 00:32शुभ
उद्वेग00:32 – 02:09टालें
शुभ02:09 – 03:46शुभ
अमृत03:46 – 05:23शुभ
चर05:23 – 07:00सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0007:56दिन
शनि07:5608:51दिन
गुरु08:5109:46दिन
मंगल09:4610:42दिन
सूर्य10:4211:37दिन
शुक्र11:3712:32दिन
बुध12:3213:28दिन
चंद्र13:2814:23दिन
शनि14:2315:18दिन
गुरु15:1816:14दिन
मंगल16:1417:09दिन
सूर्य17:0918:04दिन
शुक्र18:0419:09रात
बुध19:0920:14रात
चंद्र20:1421:18रात
शनि21:1822:23रात
गुरु22:2323:27रात
मंगल23:2700:32रात
सूर्य00:3201:37रात
शुक्र01:3702:41रात
बुध02:4103:46रात
चंद्र03:4604:51रात
शनि04:5105:55रात
गुरु05:5507:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2076° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।