5 मार्च 2025 को दुबई का पंचांग

बुधवार, 5 मार्च 2025, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

बुधवार, 5 मार्च 2025 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:21 तक), नक्षत्र कृत्तिका (23:38 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 12:30 से 13:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 18:23
रात 06:37 तक
तिथि
षष्ठी, 11:21 तक
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 23:38 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 मार्च 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:21 तक
शुक्ल सप्तमी 09:21, 6 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 22:35, 6 मार्च तक
योग
वैधृतिअशुभ 21:37 तक
विष्कंभअशुभ 18:59, 6 मार्च तक
करण
तैतिल 11:21 तक
गर 22:18 तक
वणिज 09:21, 6 मार्च तक
चंद्र राशि
मेष 06:43 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
10:10
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 13:58
यमगंड
08:06 – 09:34
गुलिक काल
11:02 – 12:30

5 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:38 – 08:06शुभ
अमृत08:06 – 09:34शुभ
काल09:34 – 11:02टालें
शुभ11:02 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 13:58टालें
उद्वेग13:58 – 15:26टालें
चर15:26 – 16:54सामान्य
लाभ16:54 – 18:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:23 – 19:54टालें
शुभ19:54 – 21:26शुभ
अमृत21:26 – 22:58शुभ
चर22:58 – 00:30सामान्य
रोग00:30 – 02:01टालें
काल02:01 – 03:33टालें
लाभ03:33 – 05:05शुभ
उद्वेग05:05 – 06:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3807:36दिन
चंद्र07:3608:35दिन
शनि08:3509:34दिन
गुरु09:3410:33दिन
मंगल10:3311:31दिन
सूर्य11:3112:30दिन
शुक्र12:3013:29दिन
बुध13:2914:28दिन
चंद्र14:2815:26दिन
शनि15:2616:25दिन
गुरु16:2517:24दिन
मंगल17:2418:23दिन
सूर्य18:2319:24रात
शुक्र19:2420:25रात
बुध20:2521:26रात
चंद्र21:2622:27रात
शनि22:2723:28रात
गुरु23:2800:30रात
मंगल00:3001:31रात
सूर्य01:3102:32रात
शुक्र02:3203:33रात
बुध03:3304:34रात
चंद्र04:3405:35रात
शनि05:3506:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2087° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।