26 अप्रैल 2025 को दुबई का पंचांग

शनिवार, 26 अप्रैल 2025, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:58 तक), नक्षत्र रेवती (02:09, 27 अप्रैल तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 09:01 से 10:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 18:46
रात 05:46 तक
तिथि
चतुर्दशी, 03:20 तक
अमावस्या
नक्षत्र
रेवती, 02:09 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:58 तक
कृष्ण चतुर्दशी 03:20, 27 अप्रैल तक
अमावस्या 23:31, 27 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 02:09, 27 अप्रैल तक
अश्विनी 23:08, 27 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 07:11 तक
विष्कंभअशुभ 03:05, 27 अप्रैल तक
प्रीति 22:49, 27 अप्रैल तक
करण
वणिज 06:58 तक
विष्टि (भद्रा) 17:11 तक
शकुनि 03:20, 27 अप्रैल तक
चतुष्पद 13:26, 27 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 02:09, 27 अप्रैल तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
04:29
चंद्रास्त
17:22
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:01 – 10:39
यमगंड
13:54 – 15:31
गुलिक काल
05:46 – 07:24

26 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:46 – 07:24टालें
शुभ07:24 – 09:01शुभ
रोग09:01 – 10:39टालें
उद्वेग10:39 – 12:16टालें
चर12:16 – 13:54सामान्य
लाभ13:54 – 15:31शुभ
अमृत15:31 – 17:09शुभ
काल17:09 – 18:46टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:46 – 20:09शुभ
उद्वेग20:09 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 22:54शुभ
अमृत22:54 – 00:16शुभ
चर00:16 – 01:38सामान्य
रोग01:38 – 03:01टालें
काल03:01 – 04:23टालें
लाभ04:23 – 05:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4606:51दिन
गुरु06:5107:56दिन
मंगल07:5609:01दिन
सूर्य09:0110:06दिन
शुक्र10:0611:11दिन
बुध11:1112:16दिन
चंद्र12:1613:21दिन
शनि13:2114:26दिन
गुरु14:2615:31दिन
मंगल15:3116:36दिन
सूर्य16:3617:41दिन
शुक्र17:4118:46दिन
बुध18:4619:41रात
चंद्र19:4120:36रात
शनि20:3621:31रात
गुरु21:3122:26रात
मंगल22:2623:21रात
सूर्य23:2100:16रात
शुक्र00:1601:11रात
बुध01:1102:06रात
चंद्र02:0603:01रात
शनि03:0103:56रात
गुरु03:5604:51रात
मंगल04:5105:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
14 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2107° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।