7 अगस्त 2025 को दुबई का पंचांग

गुरुवार, 7 अगस्त 2025, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

गुरुवार, 7 अगस्त 2025 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (12:58 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (12:31 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 19:00
रात 05:49 तक
तिथि
त्रयोदशी, 12:58 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 12:31 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अगस्त 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 12:58 तक
शुक्ल चतुर्दशी 12:42, 8 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:58, 8 अग॰ तक
योग
प्रीति 04:08, 8 अग॰ तक
आयुष्मान 02:38, 9 अग॰ तक
करण
तैतिल 12:58 तक
गर 00:54, 8 अग॰ तक
वणिज 12:42, 8 अग॰ तक
चंद्र राशि
धनु 18:41 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
17:51
चंद्रास्त
03:31
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:42
यमगंड
05:49 – 07:27
गुलिक काल
09:06 – 10:45

7 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:49 – 07:27शुभ
रोग07:27 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:24सामान्य
लाभ12:24 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:42शुभ
काल15:42 – 17:21टालें
शुभ17:21 – 19:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:00 – 20:21शुभ
चर20:21 – 21:42सामान्य
रोग21:42 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:24टालें
लाभ00:24 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:07टालें
शुभ03:07 – 04:28शुभ
अमृत04:28 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4906:54दिन
मंगल06:5408:00दिन
सूर्य08:0009:06दिन
शुक्र09:0610:12दिन
बुध10:1211:18दिन
चंद्र11:1812:24दिन
शनि12:2413:30दिन
गुरु13:3014:36दिन
मंगल14:3615:42दिन
सूर्य15:4216:48दिन
शुक्र16:4817:54दिन
बुध17:5419:00दिन
चंद्र19:0019:54रात
शनि19:5420:48रात
गुरु20:4821:42रात
मंगल21:4222:36रात
सूर्य22:3623:30रात
शुक्र23:3000:24रात
बुध00:2401:18रात
चंद्र01:1802:13रात
शनि02:1303:07रात
गुरु03:0704:01रात
मंगल04:0104:55रात
सूर्य04:5505:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
12 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2146° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।