11 दिसंबर 2027 को दुबई का पंचांग

शनिवार, 11 दिसंबर 2027, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात। समय Asia/Dubai में है।

शनिवार, 11 दिसंबर 2027 को दुबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (00:13, 12 दिस॰ तक), नक्षत्र भरणी (16:08 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 17:30 पर है। राहुकाल 09:32 से 10:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 17:30
रात 06:54 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:13 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
भरणी, 16:08 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 00:13, 12 दिस॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 22:25, 12 दिस॰ तक
नक्षत्र
भरणी 16:08 तक
कृत्तिका 15:12, 12 दिस॰ तक
योग
शिव 00:19, 12 दिस॰ तक
सिद्ध 21:39, 12 दिस॰ तक
करण
कौलव 12:53 तक
तैतिल 00:13, 12 दिस॰ तक
गर 11:23, 12 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 21:57 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
17:30
चंद्रोदय
15:21
चंद्रास्त
04:22
दिनमान
10h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
09:32 – 10:52
यमगंड
13:31 – 14:50
गुलिक काल
06:53 – 08:13

11 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:53 – 08:13टालें
शुभ08:13 – 09:32शुभ
रोग09:32 – 10:52टालें
उद्वेग10:52 – 12:11टालें
चर12:11 – 13:31सामान्य
लाभ13:31 – 14:50शुभ
अमृत14:50 – 16:10शुभ
काल16:10 – 17:30टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:30 – 19:10शुभ
उद्वेग19:10 – 20:51टालें
शुभ20:51 – 22:31शुभ
अमृत22:31 – 00:12शुभ
चर00:12 – 01:52सामान्य
रोग01:52 – 03:33टालें
काल03:33 – 05:13टालें
लाभ05:13 – 06:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5307:46दिन
गुरु07:4608:39दिन
मंगल08:3909:32दिन
सूर्य09:3210:25दिन
शुक्र10:2511:18दिन
बुध11:1812:11दिन
चंद्र12:1113:04दिन
शनि13:0413:57दिन
गुरु13:5714:50दिन
मंगल14:5015:43दिन
सूर्य15:4316:37दिन
शुक्र16:3717:30दिन
बुध17:3018:37रात
चंद्र18:3719:44रात
शनि19:4420:51रात
गुरु20:5121:58रात
मंगल21:5823:05रात
सूर्य23:0500:12रात
शुक्र00:1201:19रात
बुध01:1902:26रात
चंद्र02:2603:33रात
शनि03:3304:40रात
गुरु04:4005:47रात
मंगल05:4706:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
31 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दुबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2474° (लाहिड़ी)। समय दुबई (Asia/Dubai) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।