16 जनवरी 2026 को डरबन का पंचांग

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका। समय Africa/Johannesburg में है।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को डरबन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (18:52 तक), नक्षत्र मूल (04:42, 17 जन॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 10:21 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 19:00
रात 05:11 तक
तिथि
त्रयोदशी, 18:52 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 04:42 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 18:52 तक
कृष्ण चतुर्दशी 20:34, 17 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 04:42, 17 जन॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 06:44, 18 जन॰ तक
योग
ध्रुव 17:36 तक
व्याघातअशुभ 17:48, 17 जन॰ तक
करण
गर 05:52 तक
वणिज 18:52 तक
विष्टि (भद्रा) 07:46, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
02:37
चंद्रास्त
17:31
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
10:21 – 12:05
यमगंड
15:32 – 17:16
गुलिक काल
06:54 – 08:37

16 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:10 – 06:54सामान्य
लाभ06:54 – 08:37शुभ
अमृत08:37 – 10:21शुभ
काल10:21 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:49शुभ
रोग13:49 – 15:32टालें
उद्वेग15:32 – 17:16टालें
चर17:16 – 19:00सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:00 – 20:16टालें
काल20:16 – 21:33टालें
लाभ21:33 – 22:49शुभ
उद्वेग22:49 – 00:05टालें
शुभ00:05 – 01:22शुभ
अमृत01:22 – 02:38शुभ
चर02:38 – 03:54सामान्य
रोग03:54 – 05:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1006:19दिन
बुध06:1907:28दिन
चंद्र07:2808:37दिन
शनि08:3709:47दिन
गुरु09:4710:56दिन
मंगल10:5612:05दिन
सूर्य12:0513:14दिन
शुक्र13:1414:23दिन
बुध14:2315:32दिन
चंद्र15:3216:42दिन
शनि16:4217:51दिन
गुरु17:5119:00दिन
मंगल19:0019:51रात
सूर्य19:5120:42रात
शुक्र20:4221:33रात
बुध21:3322:24रात
चंद्र22:2423:14रात
शनि23:1400:05रात
गुरु00:0500:56रात
मंगल00:5601:47रात
सूर्य01:4702:38रात
शुक्र02:3803:29रात
बुध03:2904:20रात
चंद्र04:2005:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां डरबन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2208° (लाहिड़ी)। समय डरबन (Africa/Johannesburg) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।