डरबन का आज का पंचांग

बुधवार, 14 अक्टूबर 2026, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका। समय Africa/Johannesburg में है।

बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को डरबन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (21:43 तक), नक्षत्र अनुराधा (00:33, 15 अक्टू॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:19 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 11:42 से 13:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:19 – 18:05
रात 05:18 तक
तिथि
चतुर्थी, 21:43 तक
पंचमी
नक्षत्र
अनुराधा, 00:33 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 21:43 तक
शुक्ल पंचमी 23:55, 15 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
अनुराधा 00:33, 15 अक्टू॰ तक
ज्येष्ठा 03:17, 16 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 17:09 तक
सौभाग्य 17:45, 15 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 08:47 तक
विष्टि (भद्रा) 21:43 तक
बव 10:46, 15 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:19
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
07:17
चंद्रास्त
21:57
दिनमान
12h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:07 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:42 – 13:17
यमगंड
06:55 – 08:30
गुलिक काल
10:06 – 11:42

14 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:19 – 06:55शुभ
अमृत06:55 – 08:30शुभ
काल08:30 – 10:06टालें
शुभ10:06 – 11:42शुभ
रोग11:42 – 13:17टालें
उद्वेग13:17 – 14:53टालें
चर14:53 – 16:29सामान्य
लाभ16:29 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:05 – 19:29टालें
शुभ19:29 – 20:53शुभ
अमृत20:53 – 22:17शुभ
चर22:17 – 23:41सामान्य
रोग23:41 – 01:05टालें
काल01:05 – 02:29टालें
लाभ02:29 – 03:54शुभ
उद्वेग03:54 – 05:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1906:23दिन
चंद्र06:2307:26दिन
शनि07:2608:30दिन
गुरु08:3009:34दिन
मंगल09:3410:38दिन
सूर्य10:3811:42दिन
शुक्र11:4212:45दिन
बुध12:4513:49दिन
चंद्र13:4914:53दिन
शनि14:5315:57दिन
गुरु15:5717:01दिन
मंगल17:0118:05दिन
सूर्य18:0519:01रात
शुक्र19:0119:57रात
बुध19:5720:53रात
चंद्र20:5321:49रात
शनि21:4922:45रात
गुरु22:4523:41रात
मंगल23:4100:37रात
सूर्य00:3701:33रात
शुक्र01:3302:29रात
बुध02:2903:25रात
चंद्र03:2504:22रात
शनि04:2205:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां डरबन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2312° (लाहिड़ी)। समय डरबन (Africa/Johannesburg) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।