26 जनवरी 2025 को द्वारका का पंचांग

रविवार, 26 जनवरी 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 जनवरी 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (20:55 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (08:26 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 07:34 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 17:15 से 18:38 तक है।

दिन और रात
दिन 07:34 – 18:38
रात 07:34 तक
तिथि
द्वादशी, 20:55 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 20:55 तक
कृष्ण त्रयोदशी 20:35, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 09:02, 27 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 03:33, 27 जन॰ तक
हर्षण 01:57, 28 जन॰ तक
करण
कौलव 08:49 तक
तैतिल 20:55 तक
गर 08:50, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:34
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
04:48
चंद्रास्त
15:29
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:42
अभिजीत मुहूर्त
12:44 – 13:28

अशुभ समय

राहुकाल
17:15 – 18:38
यमगंड
13:06 – 14:29
गुलिक काल
15:52 – 17:15

26 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:34 – 08:57टालें
चर08:57 – 10:20सामान्य
लाभ10:20 – 11:43शुभ
अमृत11:43 – 13:06शुभ
काल13:06 – 14:29टालें
शुभ14:29 – 15:52शुभ
रोग15:52 – 17:15टालें
उद्वेग17:15 – 18:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:38 – 20:15शुभ
अमृत20:15 – 21:52शुभ
चर21:52 – 23:29सामान्य
रोग23:29 – 01:06टालें
काल01:06 – 02:43टालें
लाभ02:43 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:57टालें
शुभ05:57 – 07:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:3408:29दिन
शुक्र08:2909:25दिन
बुध09:2510:20दिन
चंद्र10:2011:16दिन
शनि11:1612:11दिन
गुरु12:1113:06दिन
मंगल13:0614:02दिन
सूर्य14:0214:57दिन
शुक्र14:5715:52दिन
बुध15:5216:48दिन
चंद्र16:4817:43दिन
शनि17:4318:38दिन
गुरु18:3819:43रात
मंगल19:4320:48रात
सूर्य20:4821:52रात
शुक्र21:5222:57रात
बुध22:5700:02रात
चंद्र00:0201:06रात
शनि01:0602:11रात
गुरु02:1103:15रात
मंगल03:1504:20रात
सूर्य04:2005:25रात
शुक्र05:2506:29रात
बुध06:2907:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2073° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।