10 फ़रवरी 2025 को द्वारका का पंचांग

सोमवार, 10 फ़रवरी 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 फ़रवरी 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (18:57 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (18:00 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:28 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 08:53 से 10:18 तक है।

दिन और रात
दिन 07:28 – 18:48
रात 07:27 तक
तिथि
त्रयोदशी, 18:57 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 18:00 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 18:57 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:56, 11 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 18:34, 11 फ़र॰ तक
योग
प्रीति 10:26 तक
आयुष्मान 09:05, 11 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 18:57 तक
गर 06:53, 11 फ़र॰ तक
वणिज 18:56, 11 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 11:56 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:28
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
16:46
चंद्रास्त
05:52
दिनमान
11h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:47 – 06:37
अभिजीत मुहूर्त
12:45 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
08:53 – 10:18
यमगंड
11:43 – 13:08
गुलिक काल
14:33 – 15:58

10 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:28 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:18टालें
शुभ10:18 – 11:43शुभ
रोग11:43 – 13:08टालें
उद्वेग13:08 – 14:33टालें
चर14:33 – 15:58सामान्य
लाभ15:58 – 17:23शुभ
अमृत17:23 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:23सामान्य
रोग20:23 – 21:58टालें
काल21:58 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:43टालें
शुभ02:43 – 04:18शुभ
अमृत04:18 – 05:53शुभ
चर05:53 – 07:27सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:2808:25दिन
शनि08:2509:21दिन
गुरु09:2110:18दिन
मंगल10:1811:15दिन
सूर्य11:1512:11दिन
शुक्र12:1113:08दिन
बुध13:0814:05दिन
चंद्र14:0515:01दिन
शनि15:0115:58दिन
गुरु15:5816:55दिन
मंगल16:5517:51दिन
सूर्य17:5118:48दिन
शुक्र18:4819:51रात
बुध19:5120:54रात
चंद्र20:5421:58रात
शनि21:5823:01रात
गुरु23:0100:04रात
मंगल00:0401:08रात
सूर्य01:0802:11रात
शुक्र02:1103:14रात
बुध03:1404:18रात
चंद्र04:1805:21रात
शनि05:2106:24रात
गुरु06:2407:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2078° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।