20 जनवरी 2026 को द्वारका का पंचांग

मंगलवार, 20 जनवरी 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (02:43, 21 जन॰ तक), नक्षत्र श्रवण (13:07 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:35 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 15:49 से 17:12 तक है।

दिन और रात
दिन 07:35 – 18:34
रात 07:35 तक
तिथि
द्वितीया, 02:43 तक
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण, 13:07 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:43, 21 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 02:47, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:07 तक
धनिष्ठा 13:58, 21 जन॰ तक
योग
सिद्धि 20:01 तक
व्यतीपातअशुभ 18:58, 21 जन॰ तक
करण
बालव 14:31 तक
कौलव 02:43, 21 जन॰ तक
तैतिल 14:48, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 01:35, 21 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:35
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
08:40
चंद्रास्त
20:03
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
15:49 – 17:12
यमगंड
10:20 – 11:42
गुलिक काल
13:05 – 14:27

20 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:35 – 08:58टालें
उद्वेग08:58 – 10:20टालें
चर10:20 – 11:42सामान्य
लाभ11:42 – 13:05शुभ
अमृत13:05 – 14:27शुभ
काल14:27 – 15:49टालें
शुभ15:49 – 17:12शुभ
रोग17:12 – 18:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:34 – 20:12टालें
लाभ20:12 – 21:49शुभ
उद्वेग21:49 – 23:27टालें
शुभ23:27 – 01:05शुभ
अमृत01:05 – 02:42शुभ
चर02:42 – 04:20सामान्य
रोग04:20 – 05:57टालें
काल05:57 – 07:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:3508:30दिन
सूर्य08:3009:25दिन
शुक्र09:2510:20दिन
बुध10:2011:15दिन
चंद्र11:1512:10दिन
शनि12:1013:05दिन
गुरु13:0514:00दिन
मंगल14:0014:55दिन
सूर्य14:5515:49दिन
शुक्र15:4916:44दिन
बुध16:4417:39दिन
चंद्र17:3918:34दिन
शनि18:3419:39रात
गुरु19:3920:44रात
मंगल20:4421:49रात
सूर्य21:4922:54रात
शुक्र22:5400:00रात
बुध00:0001:05रात
चंद्र01:0502:10रात
शनि02:1003:15रात
गुरु03:1504:20रात
मंगल04:2005:25रात
सूर्य05:2506:30रात
शुक्र06:3007:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2210° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।