25 मार्च 2026 को द्वारका का पंचांग

बुधवार, 25 मार्च 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 मार्च 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (13:50 तक), नक्षत्र मृगशिरा (17:33 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 13:00 से 14:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 19:06
रात 06:52 तक
तिथि
सप्तमी, 13:50 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 17:33 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 मार्च 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 13:50 तक
शुक्ल अष्टमी 11:49, 26 मार्च तक
नक्षत्र
आर्द्रा 16:19, 26 मार्च तक
योग
सौभाग्य 03:09, 26 मार्च तक
शोभन 00:31, 27 मार्च तक
करण
वणिज 13:50 तक
विष्टि (भद्रा) 00:47, 26 मार्च तक
बव 11:49, 26 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
11:41
चंद्रास्त
00:54
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:24 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:00 – 14:31
यमगंड
08:25 – 09:57
गुलिक काल
11:28 – 13:00

25 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:53 – 08:25शुभ
अमृत08:25 – 09:57शुभ
काल09:57 – 11:28टालें
शुभ11:28 – 13:00शुभ
रोग13:00 – 14:31टालें
उद्वेग14:31 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:35सामान्य
लाभ17:35 – 19:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:06 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 22:03शुभ
अमृत22:03 – 23:31शुभ
चर23:31 – 00:59सामान्य
रोग00:59 – 02:28टालें
काल02:28 – 03:56टालें
लाभ03:56 – 05:24शुभ
उद्वेग05:24 – 06:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5307:54दिन
चंद्र07:5408:55दिन
शनि08:5509:57दिन
गुरु09:5710:58दिन
मंगल10:5811:59दिन
सूर्य11:5913:00दिन
शुक्र13:0014:01दिन
बुध14:0115:02दिन
चंद्र15:0216:03दिन
शनि16:0317:04दिन
गुरु17:0418:05दिन
मंगल18:0519:06दिन
सूर्य19:0620:05रात
शुक्र20:0521:04रात
बुध21:0422:03रात
चंद्र22:0323:02रात
शनि23:0200:00रात
गुरु00:0000:59रात
मंगल00:5901:58रात
सूर्य01:5802:57रात
शुक्र02:5703:56रात
बुध03:5604:55रात
चंद्र04:5505:53रात
शनि05:5306:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2234° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।