31 अगस्त 2026 को द्वारका का पंचांग

सोमवार, 31 अगस्त 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 31 अगस्त 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (08:51 तक), नक्षत्र रेवती (03:24, 1 सित॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:36 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 08:11 से 09:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:36 – 19:12
रात 06:36 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
रेवती, 03:24 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अगस्त 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 08:51 तक
कृष्ण चतुर्थी 07:42, 1 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 03:24, 1 सित॰ तक
अश्विनी 02:42, 2 सित॰ तक
योग
गंडअशुभ 01:51, 1 सित॰ तक
वृद्धि 23:39, 1 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:51 तक
बव 20:19 तक
बालव 07:42, 1 सित॰ तक
चंद्र राशि
मीन 03:24, 1 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
21:05
चंद्रास्त
09:16
दिनमान
12h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:29 – 13:19

अशुभ समय

राहुकाल
08:11 – 09:45
यमगंड
11:19 – 12:54
गुलिक काल
14:28 – 16:03

31 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:36 – 08:11शुभ
काल08:11 – 09:45टालें
शुभ09:45 – 11:19शुभ
रोग11:19 – 12:54टालें
उद्वेग12:54 – 14:28टालें
चर14:28 – 16:03सामान्य
लाभ16:03 – 17:37शुभ
अमृत17:37 – 19:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:12 – 20:37सामान्य
रोग20:37 – 22:03टालें
काल22:03 – 23:28टालें
लाभ23:28 – 00:54शुभ
उद्वेग00:54 – 02:20टालें
शुभ02:20 – 03:45शुभ
अमृत03:45 – 05:11शुभ
चर05:11 – 06:36सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3607:39दिन
शनि07:3908:42दिन
गुरु08:4209:45दिन
मंगल09:4510:48दिन
सूर्य10:4811:51दिन
शुक्र11:5112:54दिन
बुध12:5413:57दिन
चंद्र13:5715:00दिन
शनि15:0016:03दिन
गुरु16:0317:06दिन
मंगल17:0618:09दिन
सूर्य18:0919:12दिन
शुक्र19:1220:09रात
बुध20:0921:06रात
चंद्र21:0622:03रात
शनि22:0323:00रात
गुरु23:0023:57रात
मंगल23:5700:54रात
सूर्य00:5401:51रात
शुक्र01:5102:48रात
बुध02:4803:45रात
चंद्र03:4504:42रात
शनि04:4205:39रात
गुरु05:3906:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2295° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।