3 सितंबर 2026 को द्वारका का पंचांग

गुरुवार, 3 सितंबर 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (02:25, 4 सित॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (00:29, 4 सित॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 14:27 से 16:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 19:09
रात 06:37 तक
तिथि
सप्तमी, 02:25 तक
अष्टमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 00:29 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 सितंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 02:25, 4 सित॰ तक
कृष्ण अष्टमी 00:14, 5 सित॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 00:29, 4 सित॰ तक
रोहिणी 23:04, 4 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 18:33 तक
हर्षण 15:44, 4 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:27 तक
बव 02:25, 4 सित॰ तक
बालव 13:21, 4 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 07:26 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
23:18
चंद्रास्त
12:20
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:18

अशुभ समय

राहुकाल
14:27 – 16:01
यमगंड
06:37 – 08:11
गुलिक काल
09:45 – 11:19

3 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:37 – 08:11शुभ
रोग08:11 – 09:45टालें
उद्वेग09:45 – 11:19टालें
चर11:19 – 12:53सामान्य
लाभ12:53 – 14:27शुभ
अमृत14:27 – 16:01शुभ
काल16:01 – 17:35टालें
शुभ17:35 – 19:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:09 – 20:35शुभ
चर20:35 – 22:01सामान्य
रोग22:01 – 23:27टालें
काल23:27 – 00:53टालें
लाभ00:53 – 02:19शुभ
उद्वेग02:19 – 03:45टालें
शुभ03:45 – 05:11शुभ
अमृत05:11 – 06:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3707:40दिन
मंगल07:4008:42दिन
सूर्य08:4209:45दिन
शुक्र09:4510:48दिन
बुध10:4811:50दिन
चंद्र11:5012:53दिन
शनि12:5313:56दिन
गुरु13:5614:58दिन
मंगल14:5816:01दिन
सूर्य16:0117:03दिन
शुक्र17:0318:06दिन
बुध18:0619:09दिन
चंद्र19:0920:06रात
शनि20:0621:04रात
गुरु21:0422:01रात
मंगल22:0122:58रात
सूर्य22:5823:56रात
शुक्र23:5600:53रात
बुध00:5301:50रात
चंद्र01:5002:48रात
शनि02:4803:45रात
गुरु03:4504:43रात
मंगल04:4305:40रात
सूर्य05:4006:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2296° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।