5 जनवरी 2027 को द्वारका का पंचांग

मंगलवार, 5 जनवरी 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 5 जनवरी 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (20:40 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (03:07, 6 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:34 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 15:41 से 17:02 तक है।

दिन और रात
दिन 07:34 – 18:24
रात 07:34 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:40 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 03:07 तक
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 20:40 तक
कृष्ण चतुर्दशी 23:14, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 03:07, 6 जन॰ तक
मूल 06:08, 7 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 12:43 तक
वृद्धि 13:32, 6 जन॰ तक
करण
वणिज 20:40 तक
विष्टि (भद्रा) 09:56, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 03:07, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:34
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
05:31
चंद्रास्त
16:15
दिनमान
10h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:49 – 06:41
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:21

अशुभ समय

राहुकाल
15:41 – 17:02
यमगंड
10:16 – 11:38
गुलिक काल
12:59 – 14:20

5 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:34 – 08:55टालें
उद्वेग08:55 – 10:16टालें
चर10:16 – 11:38सामान्य
लाभ11:38 – 12:59शुभ
अमृत12:59 – 14:20शुभ
काल14:20 – 15:41टालें
शुभ15:41 – 17:02शुभ
रोग17:02 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:24 – 20:03टालें
लाभ20:03 – 21:41शुभ
उद्वेग21:41 – 23:20टालें
शुभ23:20 – 00:59शुभ
अमृत00:59 – 02:38शुभ
चर02:38 – 04:17सामान्य
रोग04:17 – 05:55टालें
काल05:55 – 07:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:3408:28दिन
सूर्य08:2809:22दिन
शुक्र09:2210:16दिन
बुध10:1611:11दिन
चंद्र11:1112:05दिन
शनि12:0512:59दिन
गुरु12:5913:53दिन
मंगल13:5314:47दिन
सूर्य14:4715:41दिन
शुक्र15:4116:35दिन
बुध16:3517:30दिन
चंद्र17:3018:24दिन
शनि18:2419:30रात
गुरु19:3020:35रात
मंगल20:3521:41रात
सूर्य21:4122:47रात
शुक्र22:4723:53रात
बुध23:5300:59रात
चंद्र00:5902:05रात
शनि02:0503:11रात
गुरु03:1104:17रात
मंगल04:1705:23रात
सूर्य05:2306:28रात
शुक्र06:2807:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2344° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।