29 दिसंबर 2027 को द्वारका का पंचांग

बुधवार, 29 दिसंबर 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 दिसंबर 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (05:40, 30 दिस॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (10:07, 30 दिस॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:32 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:16 तक है।

दिन और रात
दिन 07:32 – 18:19
रात 07:32 तक
तिथि
द्वितीया, 05:40 तक
तृतीया
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 05:40, 30 दिस॰ तक
शुक्ल तृतीया 08:12, 31 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 10:07, 30 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 08:18 तक
व्याघातअशुभ 08:54, 30 दिस॰ तक
करण
बालव 16:31 तक
कौलव 05:40, 30 दिस॰ तक
तैतिल 18:54, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 14:03 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:32
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
08:38
चंद्रास्त
19:42
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:46 – 06:39
अभिजीत मुहूर्त
12:34 – 13:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:16
यमगंड
08:53 – 10:14
गुलिक काल
11:35 – 12:55

29 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:32 – 08:53शुभ
अमृत08:53 – 10:14शुभ
काल10:14 – 11:35टालें
शुभ11:35 – 12:55शुभ
रोग12:55 – 14:16टालें
उद्वेग14:16 – 15:37टालें
चर15:37 – 16:58सामान्य
लाभ16:58 – 18:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:19 – 19:58टालें
शुभ19:58 – 21:37शुभ
अमृत21:37 – 23:17शुभ
चर23:17 – 00:56सामान्य
रोग00:56 – 02:35टालें
काल02:35 – 04:14टालें
लाभ04:14 – 05:53शुभ
उद्वेग05:53 – 07:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:3208:26दिन
चंद्र08:2609:20दिन
शनि09:2010:14दिन
गुरु10:1411:08दिन
मंगल11:0812:02दिन
सूर्य12:0212:55दिन
शुक्र12:5513:49दिन
बुध13:4914:43दिन
चंद्र14:4315:37दिन
शनि15:3716:31दिन
गुरु16:3117:25दिन
मंगल17:2518:19दिन
सूर्य18:1919:25रात
शुक्र19:2520:31रात
बुध20:3121:37रात
चंद्र21:3722:43रात
शनि22:4323:50रात
गुरु23:5000:56रात
मंगल00:5602:02रात
सूर्य02:0203:08रात
शुक्र03:0804:14रात
बुध04:1405:20रात
चंद्र05:2006:26रात
शनि06:2607:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2481° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।