22 जनवरी 2028 को द्वारका का पंचांग

शनिवार, 22 जनवरी 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 22 जनवरी 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (13:04 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (09:18, 23 जन॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:35 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 10:20 से 11:43 तक है।

दिन और रात
दिन 07:35 – 18:35
रात 07:35 तक
तिथि
एकादशी, 13:04 तक
द्वादशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 13:04 तक
कृष्ण द्वादशी 14:23, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 09:18, 23 जन॰ तक
योग
वृद्धि 12:21 तक
ध्रुव 12:11, 23 जन॰ तक
करण
बालव 13:04 तक
कौलव 01:40, 23 जन॰ तक
तैतिल 14:23, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:35
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
04:04
चंद्रास्त
14:53
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:20 – 11:43
यमगंड
14:28 – 15:50
गुलिक काल
07:35 – 08:57

22 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:35 – 08:57टालें
शुभ08:57 – 10:20शुभ
रोग10:20 – 11:43टालें
उद्वेग11:43 – 13:05टालें
चर13:05 – 14:28सामान्य
लाभ14:28 – 15:50शुभ
अमृत15:50 – 17:13शुभ
काल17:13 – 18:35टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:35 – 20:13शुभ
उद्वेग20:13 – 21:50टालें
शुभ21:50 – 23:28शुभ
अमृत23:28 – 01:05शुभ
चर01:05 – 02:42सामान्य
रोग02:42 – 04:20टालें
काल04:20 – 05:57टालें
लाभ05:57 – 07:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:3508:30दिन
गुरु08:3009:25दिन
मंगल09:2510:20दिन
सूर्य10:2011:15दिन
शुक्र11:1512:10दिन
बुध12:1013:05दिन
चंद्र13:0514:00दिन
शनि14:0014:55दिन
गुरु14:5515:50दिन
मंगल15:5016:45दिन
सूर्य16:4517:40दिन
शुक्र17:4018:35दिन
बुध18:3519:40रात
चंद्र19:4020:45रात
शनि20:4521:50रात
गुरु21:5022:55रात
मंगल22:5500:00रात
सूर्य00:0001:05रात
शुक्र01:0502:10रात
बुध02:1003:15रात
चंद्र03:1504:20रात
शनि04:2005:25रात
गुरु05:2506:30रात
मंगल06:3007:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2490° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।