29 फ़रवरी 2028 को द्वारका का पंचांग

मंगलवार, 29 फ़रवरी 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 29 फ़रवरी 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (00:43, 1 मार्च तक), नक्षत्र रेवती (15:58 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 18:57 पर है। राहुकाल 16:02 से 17:29 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 18:57
रात 07:15 तक
तिथि
चतुर्थी, 00:43 तक
पंचमी
नक्षत्र
रेवती, 15:58 तक
अश्विनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 00:43, 1 मार्च तक
शुक्ल पंचमी 01:56, 2 मार्च तक
नक्षत्र
रेवती 15:58 तक
अश्विनी 17:53, 1 मार्च तक
योग
शुक्ल 23:00 तक
ब्रह्म 22:53, 1 मार्च तक
करण
वणिज 11:56 तक
विष्टि (भद्रा) 00:43, 1 मार्च तक
बव 13:23, 1 मार्च तक
चंद्र राशि
मीन 15:58 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
18:57
चंद्रोदय
09:08
चंद्रास्त
22:17
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:37 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:30

अशुभ समय

राहुकाल
16:02 – 17:29
यमगंड
10:11 – 11:38
गुलिक काल
13:06 – 14:34

29 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:15 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:11टालें
चर10:11 – 11:38सामान्य
लाभ11:38 – 13:06शुभ
अमृत13:06 – 14:34शुभ
काल14:34 – 16:02टालें
शुभ16:02 – 17:29शुभ
रोग17:29 – 18:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:57 – 20:29टालें
लाभ20:29 – 22:01शुभ
उद्वेग22:01 – 23:34टालें
शुभ23:34 – 01:06शुभ
अमृत01:06 – 02:38शुभ
चर02:38 – 04:10सामान्य
रोग04:10 – 05:42टालें
काल05:42 – 07:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:1508:14दिन
सूर्य08:1409:12दिन
शुक्र09:1210:11दिन
बुध10:1111:09दिन
चंद्र11:0912:08दिन
शनि12:0813:06दिन
गुरु13:0614:05दिन
मंगल14:0515:03दिन
सूर्य15:0316:02दिन
शुक्र16:0217:00दिन
बुध17:0017:59दिन
चंद्र17:5918:57दिन
शनि18:5719:59रात
गुरु19:5921:00रात
मंगल21:0022:01रात
सूर्य22:0123:03रात
शुक्र23:0300:04रात
बुध00:0401:06रात
चंद्र01:0602:07रात
शनि02:0703:09रात
गुरु03:0904:10रात
मंगल04:1005:12रात
सूर्य05:1206:13रात
शुक्र06:1307:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2504° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।