18 अगस्त 2028 को द्वारका का पंचांग

शुक्रवार, 18 अगस्त 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 अगस्त 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (23:00 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (15:18 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 11:21 से 12:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 19:22
रात 06:32 तक
तिथि
त्रयोदशी, 23:00 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 15:18 तक
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अगस्त 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 23:00 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:47, 19 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 13:02, 19 अग॰ तक
योग
सिद्धि 12:38 तक
व्यतीपातअशुभ 09:07, 19 अग॰ तक
करण
गर 12:26 तक
वणिज 23:00 तक
विष्टि (भद्रा) 09:27, 19 अग॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 09:47 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
03:59
चंद्रास्त
17:41
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:23

अशुभ समय

राहुकाल
11:21 – 12:57
यमगंड
16:10 – 17:46
गुलिक काल
08:08 – 09:45

18 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:32 – 08:08सामान्य
लाभ08:08 – 09:45शुभ
अमृत09:45 – 11:21शुभ
काल11:21 – 12:57टालें
शुभ12:57 – 14:34शुभ
रोग14:34 – 16:10टालें
उद्वेग16:10 – 17:46टालें
चर17:46 – 19:22सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:22 – 20:46टालें
काल20:46 – 22:10टालें
लाभ22:10 – 23:34शुभ
उद्वेग23:34 – 00:57टालें
शुभ00:57 – 02:21शुभ
अमृत02:21 – 03:45शुभ
चर03:45 – 05:09सामान्य
रोग05:09 – 06:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3207:36दिन
बुध07:3608:41दिन
चंद्र08:4109:45दिन
शनि09:4510:49दिन
गुरु10:4911:53दिन
मंगल11:5312:57दिन
सूर्य12:5714:01दिन
शुक्र14:0115:06दिन
बुध15:0616:10दिन
चंद्र16:1017:14दिन
शनि17:1418:18दिन
गुरु18:1819:22दिन
मंगल19:2220:18रात
सूर्य20:1821:14रात
शुक्र21:1422:10रात
बुध22:1023:06रात
चंद्र23:0600:02रात
शनि00:0200:57रात
गुरु00:5701:53रात
मंगल01:5302:49रात
सूर्य02:4903:45रात
शुक्र03:4504:41रात
बुध04:4105:37रात
चंद्र05:3706:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2570° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।