9 सितंबर 2028 को द्वारका का पंचांग

शनिवार, 9 सितंबर 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 9 सितंबर 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:13 तक), नक्षत्र भरणी (23:21 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 09:45 से 11:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 19:03
रात 06:39 तक
तिथि
पंचमी, 16:13 तक
षष्ठी
नक्षत्र
भरणी, 23:21 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 सितंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:13 तक
कृष्ण षष्ठी 17:29, 10 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 23:21 तक
कृत्तिका 01:04, 11 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 05:24, 10 सित॰ तक
हर्षण 05:10, 11 सित॰ तक
करण
तैतिल 16:13 तक
गर 04:55, 10 सित॰ तक
वणिज 17:29, 10 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 05:50, 10 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
22:05
चंद्रास्त
10:56
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:26 – 13:15

अशुभ समय

राहुकाल
09:45 – 11:18
यमगंड
14:24 – 15:57
गुलिक काल
06:39 – 08:12

9 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:39 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:45शुभ
रोग09:45 – 11:18टालें
उद्वेग11:18 – 12:51टालें
चर12:51 – 14:24सामान्य
लाभ14:24 – 15:57शुभ
अमृत15:57 – 17:30शुभ
काल17:30 – 19:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:03 – 20:30शुभ
उद्वेग20:30 – 21:57टालें
शुभ21:57 – 23:24शुभ
अमृत23:24 – 00:51शुभ
चर00:51 – 02:18सामान्य
रोग02:18 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:12टालें
लाभ05:12 – 06:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3907:41दिन
गुरु07:4108:43दिन
मंगल08:4309:45दिन
सूर्य09:4510:47दिन
शुक्र10:4711:49दिन
बुध11:4912:51दिन
चंद्र12:5113:53दिन
शनि13:5314:55दिन
गुरु14:5515:57दिन
मंगल15:5716:59दिन
सूर्य16:5918:01दिन
शुक्र18:0119:03दिन
बुध19:0320:01रात
चंद्र20:0120:59रात
शनि20:5921:57रात
गुरु21:5722:55रात
मंगल22:5523:53रात
सूर्य23:5300:51रात
शुक्र00:5101:49रात
बुध01:4902:47रात
चंद्र02:4703:45रात
शनि03:4504:43रात
गुरु04:4305:41रात
मंगल05:4106:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2578° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।