8 अक्टूबर 2028 को द्वारका का पंचांग

रविवार, 8 अक्टूबर 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 अक्टूबर 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (05:42, 9 अक्टू॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (06:52 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 17:06 से 18:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:34
रात 06:48 तक
तिथि
पंचमी, 05:42 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 05:42, 9 अक्टू॰ तक
कृष्ण षष्ठी 06:02, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:16, 9 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 10:57 तक
व्यतीपातअशुभ 10:28, 9 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 17:20 तक
तैतिल 05:42, 9 अक्टू॰ तक
गर 17:56, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
21:39
चंद्रास्त
10:42
दिनमान
11h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
17:06 – 18:34
यमगंड
12:41 – 14:09
गुलिक काल
15:38 – 17:06

8 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:47 – 08:16टालें
चर08:16 – 09:44सामान्य
लाभ09:44 – 11:13शुभ
अमृत11:13 – 12:41शुभ
काल12:41 – 14:09टालें
शुभ14:09 – 15:38शुभ
रोग15:38 – 17:06टालें
उद्वेग17:06 – 18:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:34 – 20:06शुभ
अमृत20:06 – 21:38शुभ
चर21:38 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:41टालें
काल00:41 – 02:13टालें
लाभ02:13 – 03:44शुभ
उद्वेग03:44 – 05:16टालें
शुभ05:16 – 06:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4707:46दिन
शुक्र07:4608:45दिन
बुध08:4509:44दिन
चंद्र09:4410:43दिन
शनि10:4311:42दिन
गुरु11:4212:41दिन
मंगल12:4113:40दिन
सूर्य13:4014:39दिन
शुक्र14:3915:38दिन
बुध15:3816:37दिन
चंद्र16:3717:36दिन
शनि17:3618:34दिन
गुरु18:3419:36रात
मंगल19:3620:37रात
सूर्य20:3721:38रात
शुक्र21:3822:39रात
बुध22:3923:40रात
चंद्र23:4000:41रात
शनि00:4101:42रात
गुरु01:4202:43रात
मंगल02:4303:44रात
सूर्य03:4404:46रात
शुक्र04:4605:47रात
बुध05:4706:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां द्वारका में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2589° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।