16 जनवरी 2025 को ईरोड का पंचांग

गुरुवार, 16 जनवरी 2025, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 16 जनवरी 2025 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (04:06, 17 जन॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (11:16 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 13:55 से 15:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 18:15
रात 06:42 तक
तिथि
तृतीया, 04:06 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
आश्लेषा, 11:16 तक
मघा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 04:06, 17 जन॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 05:30, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:45, 17 जन॰ तक
योग
आयुष्मान 01:05, 17 जन॰ तक
सौभाग्य 00:56, 18 जन॰ तक
करण
वणिज 15:39 तक
विष्टि (भद्रा) 04:06, 17 जन॰ तक
बव 16:43, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 11:16 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
20:31
चंद्रास्त
08:33
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
13:55 – 15:21
यमगंड
06:42 – 08:09
गुलिक काल
09:35 – 11:02

16 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:42 – 08:09शुभ
रोग08:09 – 09:35टालें
उद्वेग09:35 – 11:02टालें
चर11:02 – 12:28सामान्य
लाभ12:28 – 13:55शुभ
अमृत13:55 – 15:21शुभ
काल15:21 – 16:48टालें
शुभ16:48 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:15 – 19:48शुभ
चर19:48 – 21:22सामान्य
रोग21:22 – 22:55टालें
काल22:55 – 00:28टालें
लाभ00:28 – 02:02शुभ
उद्वेग02:02 – 03:35टालें
शुभ03:35 – 05:09शुभ
अमृत05:09 – 06:42शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4207:40दिन
मंगल07:4008:38दिन
सूर्य08:3809:35दिन
शुक्र09:3510:33दिन
बुध10:3311:31दिन
चंद्र11:3112:28दिन
शनि12:2813:26दिन
गुरु13:2614:24दिन
मंगल14:2415:21दिन
सूर्य15:2116:19दिन
शुक्र16:1917:17दिन
बुध17:1718:15दिन
चंद्र18:1519:17रात
शनि19:1720:19रात
गुरु20:1921:22रात
मंगल21:2222:24रात
सूर्य22:2423:26रात
शुक्र23:2600:28रात
बुध00:2801:31रात
चंद्र01:3102:33रात
शनि02:3303:35रात
गुरु03:3504:38रात
मंगल04:3805:40रात
सूर्य05:4006:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2069° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।