25 नवंबर 2027 को ईरोड का पंचांग

गुरुवार, 25 नवंबर 2027, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 25 नवंबर 2027 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (10:51 तक), नक्षत्र चित्रा (18:17 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 13:32 से 14:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 17:52
रात 06:20 तक
तिथि
द्वादशी, 10:51 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
चित्रा, 18:17 तक
स्वाति
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 10:51 तक
कृष्ण त्रयोदशी 09:48, 26 नव॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 18:17 तक
स्वाति 17:59, 26 नव॰ तक
योग
आयुष्मान 09:23 तक
सौभाग्य 07:19, 26 नव॰ तक
करण
तैतिल 10:51 तक
गर 22:17 तक
वणिज 09:48, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 06:33 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
03:31
चंद्रास्त
15:30
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
13:32 – 14:59
यमगंड
06:19 – 07:46
गुलिक काल
09:12 – 10:39

25 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:19 – 07:46शुभ
रोग07:46 – 09:12टालें
उद्वेग09:12 – 10:39टालें
चर10:39 – 12:05सामान्य
लाभ12:05 – 13:32शुभ
अमृत13:32 – 14:59शुभ
काल14:59 – 16:25टालें
शुभ16:25 – 17:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:52 – 19:25शुभ
चर19:25 – 20:59सामान्य
रोग20:59 – 22:32टालें
काल22:32 – 00:06टालें
लाभ00:06 – 01:39शुभ
उद्वेग01:39 – 03:13टालें
शुभ03:13 – 04:46शुभ
अमृत04:46 – 06:20शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1907:17दिन
मंगल07:1708:14दिन
सूर्य08:1409:12दिन
शुक्र09:1210:10दिन
बुध10:1011:08दिन
चंद्र11:0812:05दिन
शनि12:0513:03दिन
गुरु13:0314:01दिन
मंगल14:0114:59दिन
सूर्य14:5915:56दिन
शुक्र15:5616:54दिन
बुध16:5417:52दिन
चंद्र17:5218:54रात
शनि18:5419:56रात
गुरु19:5620:59रात
मंगल20:5922:01रात
सूर्य22:0123:03रात
शुक्र23:0300:06रात
बुध00:0601:08रात
चंद्र01:0802:10रात
शनि02:1003:13रात
गुरु03:1304:15रात
मंगल04:1505:17रात
सूर्य05:1706:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2468° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।