1 दिसंबर 2029 को ईरोड का पंचांग

शनिवार, 1 दिसंबर 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 1 दिसंबर 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (12:40 तक), नक्षत्र हस्त (02:15, 2 दिस॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 09:15 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:53
रात 06:23 तक
तिथि
दशमी, 12:40 तक
एकादशी
नक्षत्र
हस्त, 02:15 तक
चित्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 12:40 तक
कृष्ण एकादशी 09:52, 2 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:15, 2 दिस॰ तक
चित्रा 23:55, 2 दिस॰ तक
योग
प्रीति 07:11 तक
आयुष्मान 03:47, 2 दिस॰ तक
सौभाग्य 00:03, 3 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:40 तक
बव 23:19 तक
बालव 09:52, 2 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
01:46
चंद्रास्त
13:58
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
09:15 – 10:41
यमगंड
13:34 – 15:00
गुलिक काल
06:22 – 07:49

1 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:22 – 07:49टालें
शुभ07:49 – 09:15शुभ
रोग09:15 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:08टालें
चर12:08 – 13:34सामान्य
लाभ13:34 – 15:00शुभ
अमृत15:00 – 16:27शुभ
काल16:27 – 17:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:53 – 19:27शुभ
उद्वेग19:27 – 21:00टालें
शुभ21:00 – 22:34शुभ
अमृत22:34 – 00:08शुभ
चर00:08 – 01:42सामान्य
रोग01:42 – 03:15टालें
काल03:15 – 04:49टालें
लाभ04:49 – 06:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2207:20दिन
गुरु07:2008:17दिन
मंगल08:1709:15दिन
सूर्य09:1510:12दिन
शुक्र10:1211:10दिन
बुध11:1012:08दिन
चंद्र12:0813:05दिन
शनि13:0514:03दिन
गुरु14:0315:00दिन
मंगल15:0015:58दिन
सूर्य15:5816:55दिन
शुक्र16:5517:53दिन
बुध17:5318:55रात
चंद्र18:5519:58रात
शनि19:5821:00रात
गुरु21:0022:03रात
मंगल22:0323:05रात
सूर्य23:0500:08रात
शुक्र00:0801:10रात
बुध01:1002:13रात
चंद्र02:1303:15रात
शनि03:1504:18रात
गुरु04:1805:20रात
मंगल05:2006:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2750° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।