29 सितंबर 2025 को ह्यूस्टन का पंचांग

सोमवार, 29 सितंबर 2025, ह्यूस्टन, संयुक्त राज्य। समय America/Chicago में है।

सोमवार, 29 सितंबर 2025 को ह्यूस्टन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (07:36, 30 सित॰ तक), नक्षत्र मूल (19:47 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 08:43 से 10:12 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 19:08
रात 07:14 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
मूल, 19:47 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 07:36, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 19:47 तक
पूर्वाषाढ़ा 21:36, 30 सित॰ तक
योग
सौभाग्य 14:30 तक
शोभन 14:33, 30 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 18:53 तक
बव 07:36, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
14:20
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:37 – 06:25
अभिजीत मुहूर्त
12:47 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
08:43 – 10:12
यमगंड
11:42 – 13:11
गुलिक काल
14:40 – 16:10

29 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:13 – 08:43शुभ
काल08:43 – 10:12टालें
शुभ10:12 – 11:42शुभ
रोग11:42 – 13:11टालें
उद्वेग13:11 – 14:40टालें
चर14:40 – 16:10सामान्य
लाभ16:10 – 17:39शुभ
अमृत17:39 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:08 – 20:39सामान्य
रोग20:39 – 22:10टालें
काल22:10 – 23:41टालें
लाभ23:41 – 01:11शुभ
उद्वेग01:11 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 04:13शुभ
अमृत04:13 – 05:43शुभ
चर05:43 – 07:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1308:13दिन
शनि08:1309:13दिन
गुरु09:1310:12दिन
मंगल10:1211:12दिन
सूर्य11:1212:11दिन
शुक्र12:1113:11दिन
बुध13:1114:11दिन
चंद्र14:1115:10दिन
शनि15:1016:10दिन
गुरु16:1017:09दिन
मंगल17:0918:09दिन
सूर्य18:0919:08दिन
शुक्र19:0820:09रात
बुध20:0921:09रात
चंद्र21:0922:10रात
शनि22:1023:10रात
गुरु23:1000:11रात
मंगल00:1101:11रात
सूर्य01:1102:12रात
शुक्र02:1203:12रात
बुध03:1204:13रात
चंद्र04:1305:13रात
शनि05:1306:14रात
गुरु06:1407:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ह्यूस्टन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2167° (लाहिड़ी)। समय ह्यूस्टन (America/Chicago) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।