17 सितंबर 2026 को हावड़ा का पंचांग

गुरुवार, 17 सितंबर 2026, हावड़ा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को हावड़ा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (10:48 तक), नक्षत्र अनुराधा (19:53 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 13:03 से 14:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 17:38
रात 05:24 तक
तिथि
षष्ठी, 10:48 तक
सप्तमी
नक्षत्र
अनुराधा, 19:53 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 सितंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 10:48 तक
शुक्ल सप्तमी 13:01, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 22:44, 18 सित॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 12:49 तक
प्रीति 13:34, 18 सित॰ तक
करण
तैतिल 10:48 तक
गर 23:52 तक
वणिज 13:01, 18 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
10:54
चंद्रास्त
21:38
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
13:03 – 14:34
यमगंड
05:24 – 06:55
गुलिक काल
08:27 – 09:59

17 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:24 – 06:55शुभ
रोग06:55 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:59टालें
चर09:59 – 11:31सामान्य
लाभ11:31 – 13:03शुभ
अमृत13:03 – 14:34शुभ
काल14:34 – 16:06टालें
शुभ16:06 – 17:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:38 – 19:06शुभ
चर19:06 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 22:03टालें
काल22:03 – 23:31टालें
लाभ23:31 – 00:59शुभ
उद्वेग00:59 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:24शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2406:25दिन
मंगल06:2507:26दिन
सूर्य07:2608:27दिन
शुक्र08:2709:28दिन
बुध09:2810:30दिन
चंद्र10:3011:31दिन
शनि11:3112:32दिन
गुरु12:3213:33दिन
मंगल13:3314:34दिन
सूर्य14:3415:36दिन
शुक्र15:3616:37दिन
बुध16:3717:38दिन
चंद्र17:3818:37रात
शनि18:3719:36रात
गुरु19:3620:35रात
मंगल20:3521:33रात
सूर्य21:3322:32रात
शुक्र22:3223:31रात
बुध23:3100:30रात
चंद्र00:3001:29रात
शनि01:2902:27रात
गुरु02:2703:26रात
मंगल03:2604:25रात
सूर्य04:2505:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां हावड़ा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2302° (लाहिड़ी)। समय हावड़ा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।