9 अगस्त 2026 को हैदराबाद का पंचांग

रविवार, 9 अगस्त 2026, हैदराबाद, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 अगस्त 2026 को हैदराबाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (11:05 तक), नक्षत्र मृगशिरा (14:43 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 17:09 से 18:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:45
रात 05:57 तक
तिथि
एकादशी, 11:05 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 14:43 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अगस्त 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 11:05 तक
कृष्ण द्वादशी 08:01, 10 अग॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 12:27, 10 अग॰ तक
योग
हर्षण 02:04, 10 अग॰ तक
वज्रअशुभ 22:27, 10 अग॰ तक
करण
बालव 11:05 तक
कौलव 21:34 तक
तैतिल 08:01, 10 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
01:57
चंद्रास्त
15:48
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:09 – 18:45
यमगंड
12:21 – 13:57
गुलिक काल
15:33 – 17:09

9 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:57 – 07:33टालें
चर07:33 – 09:09सामान्य
लाभ09:09 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:21शुभ
काल12:21 – 13:57टालें
शुभ13:57 – 15:33शुभ
रोग15:33 – 17:09टालें
उद्वेग17:09 – 18:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:45 – 20:09शुभ
अमृत20:09 – 21:33शुभ
चर21:33 – 22:57सामान्य
रोग22:57 – 00:21टालें
काल00:21 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:09शुभ
उद्वेग03:09 – 04:33टालें
शुभ04:33 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5707:01दिन
शुक्र07:0108:05दिन
बुध08:0509:09दिन
चंद्र09:0910:13दिन
शनि10:1311:17दिन
गुरु11:1712:21दिन
मंगल12:2113:25दिन
सूर्य13:2514:29दिन
शुक्र14:2915:33दिन
बुध15:3316:37दिन
चंद्र16:3717:41दिन
शनि17:4118:45दिन
गुरु18:4519:41रात
मंगल19:4120:37रात
सूर्य20:3721:33रात
शुक्र21:3322:29रात
बुध22:2923:25रात
चंद्र23:2500:21रात
शनि00:2101:17रात
गुरु01:1702:13रात
मंगल02:1303:09रात
सूर्य03:0904:05रात
शुक्र04:0505:01रात
बुध05:0105:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां हैदराबाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2287° (लाहिड़ी)। समय हैदराबाद (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।