26 दिसंबर 2025 को इम्फाल का पंचांग

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (13:44 तक), नक्षत्र शतभिषा (09:00 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 16:32 पर है। राहुकाल 09:55 से 11:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 16:32
रात 05:57 तक
तिथि
षष्ठी, 13:44 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 09:00 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 13:44 तक
शुक्ल सप्तमी 13:10, 27 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:00 तक
पूर्वा भाद्रपद 09:09, 27 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 14:01 तक
व्यतीपातअशुभ 12:21, 27 दिस॰ तक
करण
तैतिल 13:44 तक
गर 01:31, 27 दिस॰ तक
वणिज 13:10, 27 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 03:10, 27 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
16:32
चंद्रोदय
10:09
चंद्रास्त
22:14
दिनमान
10h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
10:53 – 11:35

अशुभ समय

राहुकाल
09:55 – 11:14
यमगंड
13:53 – 15:13
गुलिक काल
07:16 – 08:35

26 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:56 – 07:16सामान्य
लाभ07:16 – 08:35शुभ
अमृत08:35 – 09:55शुभ
काल09:55 – 11:14टालें
शुभ11:14 – 12:34शुभ
रोग12:34 – 13:53टालें
उद्वेग13:53 – 15:13टालें
चर15:13 – 16:32सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:32 – 18:13टालें
काल18:13 – 19:53टालें
लाभ19:53 – 21:34शुभ
उद्वेग21:34 – 23:14टालें
शुभ23:14 – 00:55शुभ
अमृत00:55 – 02:36शुभ
चर02:36 – 04:16सामान्य
रोग04:16 – 05:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5606:49दिन
बुध06:4907:42दिन
चंद्र07:4208:35दिन
शनि08:3509:28दिन
गुरु09:2810:21दिन
मंगल10:2111:14दिन
सूर्य11:1412:07दिन
शुक्र12:0713:00दिन
बुध13:0013:53दिन
चंद्र13:5314:46दिन
शनि14:4615:39दिन
गुरु15:3916:32दिन
मंगल16:3217:39रात
सूर्य17:3918:46रात
शुक्र18:4619:53रात
बुध19:5321:00रात
चंद्र21:0022:07रात
शनि22:0723:14रात
गुरु23:1400:21रात
मंगल00:2101:29रात
सूर्य01:2902:36रात
शुक्र02:3603:43रात
बुध03:4304:50रात
चंद्र04:5005:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2200° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।