1 मार्च 2027 को इम्फाल का पंचांग

सोमवार, 1 मार्च 2027, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 1 मार्च 2027 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (02:07, 2 मार्च तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (16:27 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 07:04 से 08:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 17:16
रात 05:36 तक
तिथि
नवमी, 02:07 तक
दशमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 16:27 तक
मूल
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 मार्च 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण नवमी 02:07, 2 मार्च तक
कृष्ण दशमी 04:44, 3 मार्च तक
नक्षत्र
मूल 19:27, 2 मार्च तक
योग
वज्रअशुभ 23:11 तक
सिद्धि 00:07, 3 मार्च तक
करण
तैतिल 12:54 तक
गर 02:07, 2 मार्च तक
वणिज 15:24, 2 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
00:35
चंद्रास्त
11:04
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
07:04 – 08:32
यमगंड
09:59 – 11:26
गुलिक काल
12:54 – 14:21

1 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:37 – 07:04शुभ
काल07:04 – 08:32टालें
शुभ08:32 – 09:59शुभ
रोग09:59 – 11:26टालें
उद्वेग11:26 – 12:54टालें
चर12:54 – 14:21सामान्य
लाभ14:21 – 15:48शुभ
अमृत15:48 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:16 – 18:48सामान्य
रोग18:48 – 20:21टालें
काल20:21 – 21:53टालें
लाभ21:53 – 23:26शुभ
उद्वेग23:26 – 00:58टालें
शुभ00:58 – 02:31शुभ
अमृत02:31 – 04:03शुभ
चर04:03 – 05:36सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3706:35दिन
शनि06:3507:33दिन
गुरु07:3308:32दिन
मंगल08:3209:30दिन
सूर्य09:3010:28दिन
शुक्र10:2811:26दिन
बुध11:2612:25दिन
चंद्र12:2513:23दिन
शनि13:2314:21दिन
गुरु14:2115:19दिन
मंगल15:1916:17दिन
सूर्य16:1717:16दिन
शुक्र17:1618:17रात
बुध18:1719:19रात
चंद्र19:1920:21रात
शनि20:2121:22रात
गुरु21:2222:24रात
मंगल22:2423:26रात
सूर्य23:2600:28रात
शुक्र00:2801:29रात
बुध01:2902:31रात
चंद्र02:3103:33रात
शनि03:3304:34रात
गुरु04:3405:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2365° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।