25 अक्टूबर 2027 को इम्फाल का पंचांग

सोमवार, 25 अक्टूबर 2027, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 अक्टूबर 2027 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (05:40 तक), नक्षत्र मघा (16:09 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 16:39 पर है। राहुकाल 06:42 से 08:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 16:39
रात 05:17 तक
तिथि
एकादशी, 03:22 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मघा, 16:09 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण दशमी 05:40 तक
कृष्ण एकादशी 03:22, 26 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 01:04, 27 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:09 तक
पूर्वा फाल्गुनी 14:34, 26 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 14:47 तक
ब्रह्म 11:44, 26 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 05:40 तक
बव 16:32 तक
बालव 03:22, 26 अक्टू॰ तक
कौलव 14:13, 26 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
16:39
चंद्रोदय
00:43
चंद्रास्त
13:40
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:36 – 04:26
अभिजीत मुहूर्त
10:35 – 11:20

अशुभ समय

राहुकाल
06:42 – 08:07
यमगंड
09:32 – 10:58
गुलिक काल
12:23 – 13:48

25 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:17 – 06:42शुभ
काल06:42 – 08:07टालें
शुभ08:07 – 09:32शुभ
रोग09:32 – 10:58टालें
उद्वेग10:58 – 12:23टालें
चर12:23 – 13:48सामान्य
लाभ13:48 – 15:14शुभ
अमृत15:14 – 16:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:39 – 18:14सामान्य
रोग18:14 – 19:48टालें
काल19:48 – 21:23टालें
लाभ21:23 – 22:58शुभ
उद्वेग22:58 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 02:08शुभ
अमृत02:08 – 03:42शुभ
चर03:42 – 05:17सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1706:13दिन
शनि06:1307:10दिन
गुरु07:1008:07दिन
मंगल08:0709:04दिन
सूर्य09:0410:01दिन
शुक्र10:0110:58दिन
बुध10:5811:55दिन
चंद्र11:5512:51दिन
शनि12:5113:48दिन
गुरु13:4814:45दिन
मंगल14:4515:42दिन
सूर्य15:4216:39दिन
शुक्र16:3917:42रात
बुध17:4218:45रात
चंद्र18:4519:48रात
शनि19:4820:52रात
गुरु20:5221:55रात
मंगल21:5522:58रात
सूर्य22:5800:01रात
शुक्र00:0101:04रात
बुध01:0402:08रात
चंद्र02:0803:11रात
शनि03:1104:14रात
गुरु04:1405:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2456° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।