10 फ़रवरी 2029 को इम्फाल का पंचांग

शनिवार, 10 फ़रवरी 2029, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 10 फ़रवरी 2029 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (12:49 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (22:25 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:05 पर है। राहुकाल 08:40 से 10:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:05
रात 05:51 तक
तिथि
द्वादशी, 12:49 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 22:25 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 12:49 तक
कृष्ण त्रयोदशी 13:30, 11 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 23:48, 11 फ़र॰ तक
योग
वज्रअशुभ 14:19 तक
सिद्धि 13:42, 11 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 12:49 तक
गर 01:07, 11 फ़र॰ तक
वणिज 13:30, 11 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
धनु 04:44, 11 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:05
चंद्रोदय
03:26
चंद्रास्त
14:19
दिनमान
11h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:06 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
08:40 – 10:04
यमगंड
12:52 – 14:16
गुलिक काल
05:51 – 07:15

10 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:51 – 07:15टालें
शुभ07:15 – 08:40शुभ
रोग08:40 – 10:04टालें
उद्वेग10:04 – 11:28टालें
चर11:28 – 12:52सामान्य
लाभ12:52 – 14:16शुभ
अमृत14:16 – 15:41शुभ
काल15:41 – 17:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:05 – 18:41शुभ
उद्वेग18:41 – 20:16टालें
शुभ20:16 – 21:52शुभ
अमृत21:52 – 23:28शुभ
चर23:28 – 01:03सामान्य
रोग01:03 – 02:39टालें
काल02:39 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5106:47दिन
गुरु06:4707:43दिन
मंगल07:4308:40दिन
सूर्य08:4009:36दिन
शुक्र09:3610:32दिन
बुध10:3211:28दिन
चंद्र11:2812:24दिन
शनि12:2413:20दिन
गुरु13:2014:16दिन
मंगल14:1615:13दिन
सूर्य15:1316:09दिन
शुक्र16:0917:05दिन
बुध17:0518:09रात
चंद्र18:0919:13रात
शनि19:1320:16रात
गुरु20:1621:20रात
मंगल21:2022:24रात
सूर्य22:2423:28रात
शुक्र23:2800:32रात
बुध00:3201:35रात
चंद्र01:3502:39रात
शनि02:3903:43रात
गुरु03:4304:47रात
मंगल04:4705:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2637° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।