16 अक्टूबर 2029 को इम्फाल का पंचांग

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2029, इम्फाल, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2029 को इम्फाल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (05:23, 17 अक्टू॰ तक), नक्षत्र श्रवण (17:22 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 16:46 पर है। राहुकाल 13:53 से 15:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 16:46
रात 05:13 तक
तिथि
दशमी
नक्षत्र
श्रवण, 17:22 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:23, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:22 तक
धनिष्ठा 18:58, 17 अक्टू॰ तक
योग
धृति 07:11 तक
शूलअशुभ 06:43, 17 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:56 तक
गर 05:23, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
16:46
चंद्रोदय
13:04
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:33 – 04:23
अभिजीत मुहूर्त
10:36 – 11:22

अशुभ समय

राहुकाल
13:53 – 15:19
यमगंड
08:06 – 09:32
गुलिक काल
10:59 – 12:26

16 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:12 – 06:39टालें
उद्वेग06:39 – 08:06टालें
चर08:06 – 09:32सामान्य
लाभ09:32 – 10:59शुभ
अमृत10:59 – 12:26शुभ
काल12:26 – 13:53टालें
शुभ13:53 – 15:19शुभ
रोग15:19 – 16:46टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:46 – 18:19टालें
लाभ18:19 – 19:53शुभ
उद्वेग19:53 – 21:26टालें
शुभ21:26 – 22:59शुभ
अमृत22:59 – 00:33शुभ
चर00:33 – 02:06सामान्य
रोग02:06 – 03:39टालें
काल03:39 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1206:10दिन
सूर्य06:1007:08दिन
शुक्र07:0808:06दिन
बुध08:0609:03दिन
चंद्र09:0310:01दिन
शनि10:0110:59दिन
गुरु10:5911:57दिन
मंगल11:5712:55दिन
सूर्य12:5513:53दिन
शुक्र13:5314:50दिन
बुध14:5015:48दिन
चंद्र15:4816:46दिन
शनि16:4617:48रात
गुरु17:4818:50रात
मंगल18:5019:53रात
सूर्य19:5320:55रात
शुक्र20:5521:57रात
बुध21:5722:59रात
चंद्र22:5900:02रात
शनि00:0201:04रात
गुरु01:0402:06रात
मंगल02:0603:08रात
सूर्य03:0804:10रात
शुक्र04:1005:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां इम्फाल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2732° (लाहिड़ी)। समय इम्फाल (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।