8 अक्टूबर 2025 को इंदौर का पंचांग

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025, इंदौर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 को इंदौर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (02:23, 9 अक्टू॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (22:44 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 12:13 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:07
रात 06:20 तक
तिथि
द्वितीया, 02:23 तक
तृतीया
नक्षत्र
अश्विनी, 22:44 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 02:23, 9 अक्टू॰ तक
कृष्ण तृतीया 22:54, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:02, 9 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 01:32, 9 अक्टू॰ तक
वज्रअशुभ 21:32, 9 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:08 तक
गर 02:23, 9 अक्टू॰ तक
वणिज 12:38, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
18:54
चंद्रास्त
07:20
दिनमान
11h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:13 – 13:42
यमगंड
07:48 – 09:17
गुलिक काल
10:45 – 12:13

8 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:20 – 07:48शुभ
अमृत07:48 – 09:17शुभ
काल09:17 – 10:45टालें
शुभ10:45 – 12:13शुभ
रोग12:13 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:10टालें
चर15:10 – 16:39सामान्य
लाभ16:39 – 18:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:07 – 19:39टालें
शुभ19:39 – 21:10शुभ
अमृत21:10 – 22:42शुभ
चर22:42 – 00:14सामान्य
रोग00:14 – 01:45टालें
काल01:45 – 03:17टालें
लाभ03:17 – 04:49शुभ
उद्वेग04:49 – 06:20टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2007:19दिन
चंद्र07:1908:18दिन
शनि08:1809:17दिन
गुरु09:1710:16दिन
मंगल10:1611:15दिन
सूर्य11:1512:13दिन
शुक्र12:1313:12दिन
बुध13:1214:11दिन
चंद्र14:1115:10दिन
शनि15:1016:09दिन
गुरु16:0917:08दिन
मंगल17:0818:07दिन
सूर्य18:0719:08रात
शुक्र19:0820:09रात
बुध20:0921:10रात
चंद्र21:1022:11रात
शनि22:1123:13रात
गुरु23:1300:14रात
मंगल00:1401:15रात
सूर्य01:1502:16रात
शुक्र02:1603:17रात
बुध03:1704:18रात
चंद्र04:1805:19रात
शनि05:1906:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां इंदौर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2170° (लाहिड़ी)। समय इंदौर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।