3 अक्टूबर 2028 को इंदौर का पंचांग

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2028, इंदौर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2028 को इंदौर में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (21:55 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (21:48 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 15:13 से 16:42 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 18:11
रात 06:19 तक
तिथि
पूर्णिमा, 21:55 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 21:48 तक
रेवती
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 21:55 तक
कृष्ण प्रतिपदा 00:04, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 00:28, 5 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 09:19 तक
ध्रुव 10:03, 4 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:45 तक
बव 21:55 तक
बालव 11:01, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
17:47
चंद्रास्त
05:49
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
15:13 – 16:42
यमगंड
09:17 – 10:46
गुलिक काल
12:15 – 13:44

3 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:18 – 07:47टालें
उद्वेग07:47 – 09:17टालें
चर09:17 – 10:46सामान्य
लाभ10:46 – 12:15शुभ
अमृत12:15 – 13:44शुभ
काल13:44 – 15:13टालें
शुभ15:13 – 16:42शुभ
रोग16:42 – 18:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:11 – 19:42टालें
लाभ19:42 – 21:13शुभ
उद्वेग21:13 – 22:44टालें
शुभ22:44 – 00:15शुभ
अमृत00:15 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:17सामान्य
रोग03:17 – 04:48टालें
काल04:48 – 06:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1807:18दिन
सूर्य07:1808:17दिन
शुक्र08:1709:17दिन
बुध09:1710:16दिन
चंद्र10:1611:15दिन
शनि11:1512:15दिन
गुरु12:1513:14दिन
मंगल13:1414:14दिन
सूर्य14:1415:13दिन
शुक्र15:1316:13दिन
बुध16:1317:12दिन
चंद्र17:1218:11दिन
शनि18:1119:12रात
गुरु19:1220:13रात
मंगल20:1321:13रात
सूर्य21:1322:14रात
शुक्र22:1423:14रात
बुध23:1400:15रात
चंद्र00:1501:16रात
शनि01:1602:16रात
गुरु02:1603:17रात
मंगल03:1704:17रात
सूर्य04:1705:18रात
शुक्र05:1806:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां इंदौर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2587° (लाहिड़ी)। समय इंदौर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।