21 जून 2025 को जयपुर का पंचांग

शनिवार, 21 जून 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 21 जून 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (07:19 तक), नक्षत्र अश्विनी (19:50 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 09:01 से 10:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 19:23
रात 05:33 तक
तिथि
एकादशी, 04:28 तक
नक्षत्र
अश्विनी, 19:50 तक
भरणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जून 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण दशमी 07:19 तक
कृष्ण एकादशी 04:28, 22 जून तक
कृष्ण द्वादशी 01:22, 23 जून तक
नक्षत्र
भरणी 17:38, 22 जून तक
योग
अतिगंडअशुभ 20:29 तक
सुकर्मा 16:57, 22 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:19 तक
बव 17:55 तक
बालव 04:28, 22 जून तक
कौलव 14:56, 22 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
01:38
चंद्रास्त
15:05
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
09:01 – 10:44
यमगंड
14:12 – 15:56
गुलिक काल
05:33 – 07:17

21 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:33 – 07:17टालें
शुभ07:17 – 09:01शुभ
रोग09:01 – 10:44टालें
उद्वेग10:44 – 12:28टालें
चर12:28 – 14:12सामान्य
लाभ14:12 – 15:56शुभ
अमृत15:56 – 17:39शुभ
काल17:39 – 19:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:23 – 20:39शुभ
उद्वेग20:39 – 21:56टालें
शुभ21:56 – 23:12शुभ
अमृत23:12 – 00:28शुभ
चर00:28 – 01:45सामान्य
रोग01:45 – 03:01टालें
काल03:01 – 04:17टालें
लाभ04:17 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3306:42दिन
गुरु06:4207:51दिन
मंगल07:5109:01दिन
सूर्य09:0110:10दिन
शुक्र10:1011:19दिन
बुध11:1912:28दिन
चंद्र12:2813:37दिन
शनि13:3714:47दिन
गुरु14:4715:56दिन
मंगल15:5617:05दिन
सूर्य17:0518:14दिन
शुक्र18:1419:23दिन
बुध19:2320:14रात
चंद्र20:1421:05रात
शनि21:0521:56रात
गुरु21:5622:47रात
मंगल22:4723:37रात
सूर्य23:3700:28रात
शुक्र00:2801:19रात
बुध01:1902:10रात
चंद्र02:1003:01रात
शनि03:0103:52रात
गुरु03:5204:42रात
मंगल04:4205:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2128° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।