23 अप्रैल 2026 को जयपुर का पंचांग

गुरुवार, 23 अप्रैल 2026, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (20:49 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (20:57 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 14:02 से 15:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 18:55
रात 05:54 तक
तिथि
सप्तमी, 20:49 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 20:57 तक
पुष्य
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 20:49 तक
शुक्ल अष्टमी 19:22, 24 अप्रैल तक
नक्षत्र
पुष्य 20:14, 24 अप्रैल तक
योग
सुकर्मा 06:07 तक
धृति 03:32, 24 अप्रैल तक
शूलअशुभ 01:24, 25 अप्रैल तक
करण
गर 09:45 तक
वणिज 20:49 तक
विष्टि (भद्रा) 08:01, 24 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मिथुन 15:13 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
11:03
चंद्रास्त
00:31
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
14:02 – 15:40
यमगंड
05:55 – 07:33
गुलिक काल
09:10 – 10:47

23 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:55 – 07:33शुभ
रोग07:33 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:47टालें
चर10:47 – 12:25सामान्य
लाभ12:25 – 14:02शुभ
अमृत14:02 – 15:40शुभ
काल15:40 – 17:17टालें
शुभ17:17 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:55 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:40सामान्य
रोग21:40 – 23:02टालें
काल23:02 – 00:24टालें
लाभ00:24 – 01:47शुभ
उद्वेग01:47 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:32शुभ
अमृत04:32 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5507:00दिन
मंगल07:0008:05दिन
सूर्य08:0509:10दिन
शुक्र09:1010:15दिन
बुध10:1511:20दिन
चंद्र11:2012:25दिन
शनि12:2513:30दिन
गुरु13:3014:35दिन
मंगल14:3515:40दिन
सूर्य15:4016:45दिन
शुक्र16:4517:50दिन
बुध17:5018:55दिन
चंद्र18:5519:50रात
शनि19:5020:45रात
गुरु20:4521:40रात
मंगल21:4022:35रात
सूर्य22:3523:29रात
शुक्र23:2900:24रात
बुध00:2401:19रात
चंद्र01:1902:14रात
शनि02:1403:09रात
गुरु03:0904:04रात
मंगल04:0404:59रात
सूर्य04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2245° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।