29 जुलाई 2026 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 29 जुलाई 2026, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 29 जुलाई 2026 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (20:05 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (15:37 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 19:16 पर है। राहुकाल 12:33 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 19:16
रात 05:50 तक
तिथि
पूर्णिमा, 20:05 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 15:37 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 जुलाई 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 20:05 तक
कृष्ण प्रतिपदा 21:30, 30 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:43, 30 जुल॰ तक
योग
प्रीति 23:57 तक
आयुष्मान 00:05, 31 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:15 तक
बव 20:05 तक
बालव 08:51, 30 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
19:16
चंद्रोदय
19:19
चंद्रास्त
05:16
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 13:00 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:33 – 14:14
यमगंड
07:30 – 09:11
गुलिक काल
10:52 – 12:33

29 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:49 – 07:30शुभ
अमृत07:30 – 09:11शुभ
काल09:11 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:33शुभ
रोग12:33 – 14:14टालें
उद्वेग14:14 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:35सामान्य
लाभ17:35 – 19:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:16 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:14शुभ
चर23:14 – 00:33सामान्य
रोग00:33 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:11टालें
लाभ03:11 – 04:30शुभ
उद्वेग04:30 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4906:56दिन
चंद्र06:5608:04दिन
शनि08:0409:11दिन
गुरु09:1110:18दिन
मंगल10:1811:25दिन
सूर्य11:2512:33दिन
शुक्र12:3313:40दिन
बुध13:4014:47दिन
चंद्र14:4715:55दिन
शनि15:5517:02दिन
गुरु17:0218:09दिन
मंगल18:0919:16दिन
सूर्य19:1620:09रात
शुक्र20:0921:02रात
बुध21:0221:55रात
चंद्र21:5522:47रात
शनि22:4723:40रात
गुरु23:4000:33रात
मंगल00:3301:26रात
सूर्य01:2602:19रात
शुक्र02:1903:11रात
बुध03:1104:04रात
चंद्र04:0404:57रात
शनि04:5705:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2283° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।