28 अगस्त 2026 को जयपुर का पंचांग

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (09:48 तक), नक्षत्र शतभिषा (03:13, 29 अग॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 10:52 से 12:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:51
रात 06:04 तक
तिथि
पूर्णिमा, 09:48 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 03:13 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अगस्त 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
पूर्णिमा 09:48 तक
कृष्ण प्रतिपदा 09:57, 29 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 03:13, 29 अग॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 03:42, 30 अग॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 07:27 तक
सुकर्मा 06:36, 29 अग॰ तक
करण
बव 09:48 तक
बालव 21:56 तक
कौलव 09:57, 29 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
18:58
चंद्रास्त
05:59
दिनमान
12h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
10:52 – 12:27
यमगंड
15:39 – 17:15
गुलिक काल
07:40 – 09:16

28 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:04 – 07:40सामान्य
लाभ07:40 – 09:16शुभ
अमृत09:16 – 10:52शुभ
काल10:52 – 12:27टालें
शुभ12:27 – 14:03शुभ
रोग14:03 – 15:39टालें
उद्वेग15:39 – 17:15टालें
चर17:15 – 18:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:51 – 20:15टालें
काल20:15 – 21:39टालें
लाभ21:39 – 23:04शुभ
उद्वेग23:04 – 00:28टालें
शुभ00:28 – 01:52शुभ
अमृत01:52 – 03:16शुभ
चर03:16 – 04:40सामान्य
रोग04:40 – 06:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0407:08दिन
बुध07:0808:12दिन
चंद्र08:1209:16दिन
शनि09:1610:20दिन
गुरु10:2011:24दिन
मंगल11:2412:27दिन
सूर्य12:2713:31दिन
शुक्र13:3114:35दिन
बुध14:3515:39दिन
चंद्र15:3916:43दिन
शनि16:4317:47दिन
गुरु17:4718:51दिन
मंगल18:5119:47रात
सूर्य19:4720:43रात
शुक्र20:4321:39रात
बुध21:3922:35रात
चंद्र22:3523:32रात
शनि23:3200:28रात
गुरु00:2801:24रात
मंगल01:2402:20रात
सूर्य02:2003:16रात
शुक्र03:1604:12रात
बुध04:1205:08रात
चंद्र05:0806:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2294° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।