5 जनवरी 2028 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 5 जनवरी 2028, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 5 जनवरी 2028 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (19:50 तक), नक्षत्र रेवती (02:31, 6 जन॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:16 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है। राहुकाल 12:31 से 13:50 तक है।

दिन और रात
दिन 07:16 – 17:47
रात 07:16 तक
तिथि
अष्टमी, 19:50 तक
नवमी
नक्षत्र
रेवती, 02:31 तक
अश्विनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 19:50 तक
शुक्ल नवमी 20:35, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 02:31, 6 जन॰ तक
अश्विनी 03:35, 7 जन॰ तक
योग
परिघअशुभ 13:15 तक
शिव 12:50, 6 जन॰ तक
करण
बव 19:50 तक
बालव 08:18, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 02:31, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:16
सूर्यास्त
17:47
चंद्रोदय
12:00
चंद्रास्त
00:20
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:28 – 06:22
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:31 – 13:50
यमगंड
08:35 – 09:54
गुलिक काल
11:13 – 12:31

5 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:16 – 08:35शुभ
अमृत08:35 – 09:54शुभ
काल09:54 – 11:13टालें
शुभ11:13 – 12:31शुभ
रोग12:31 – 13:50टालें
उद्वेग13:50 – 15:09टालें
चर15:09 – 16:28सामान्य
लाभ16:28 – 17:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:47 – 19:28टालें
शुभ19:28 – 21:09शुभ
अमृत21:09 – 22:50शुभ
चर22:50 – 00:32सामान्य
रोग00:32 – 02:13टालें
काल02:13 – 03:54टालें
लाभ03:54 – 05:35शुभ
उद्वेग05:35 – 07:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:1608:09दिन
चंद्र08:0909:01दिन
शनि09:0109:54दिन
गुरु09:5410:46दिन
मंगल10:4611:39दिन
सूर्य11:3912:31दिन
शुक्र12:3113:24दिन
बुध13:2414:17दिन
चंद्र14:1715:09दिन
शनि15:0916:02दिन
गुरु16:0216:54दिन
मंगल16:5417:47दिन
सूर्य17:4718:54रात
शुक्र18:5420:02रात
बुध20:0221:09रात
चंद्र21:0922:17रात
शनि22:1723:24रात
गुरु23:2400:32रात
मंगल00:3201:39रात
सूर्य01:3902:47रात
शुक्र02:4703:54रात
बुध03:5405:01रात
चंद्र05:0106:09रात
शनि06:0907:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2483° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।