24 मई 2028 को जयपुर का पंचांग

बुधवार, 24 मई 2028, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 24 मई 2028 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (13:46 तक), नक्षत्र कृत्तिका (14:47 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 12:23 से 14:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 19:12
रात 05:34 तक
तिथि
अमावस्या, 13:46 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
कृत्तिका, 14:47 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 मई 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 13:46 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:54, 25 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 14:38, 25 मई तक
योग
अतिगंडअशुभ 15:40 तक
सुकर्मा 13:55, 25 मई तक
करण
नाग 13:46 तक
किंस्तुघ्न 01:23, 25 मई तक
बव 12:54, 25 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
05:09
चंद्रास्त
19:27
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:51 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:23 – 14:06
यमगंड
07:17 – 08:59
गुलिक काल
10:41 – 12:23

24 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:35 – 07:17शुभ
अमृत07:17 – 08:59शुभ
काल08:59 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:23शुभ
रोग12:23 – 14:06टालें
उद्वेग14:06 – 15:48टालें
चर15:48 – 17:30सामान्य
लाभ17:30 – 19:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:12 – 20:30टालें
शुभ20:30 – 21:48शुभ
अमृत21:48 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:23सामान्य
रोग00:23 – 01:41टालें
काल01:41 – 02:59टालें
लाभ02:59 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3506:43दिन
चंद्र06:4307:51दिन
शनि07:5108:59दिन
गुरु08:5910:07दिन
मंगल10:0711:15दिन
सूर्य11:1512:23दिन
शुक्र12:2313:31दिन
बुध13:3114:40दिन
चंद्र14:4015:48दिन
शनि15:4816:56दिन
गुरु16:5618:04दिन
मंगल18:0419:12दिन
सूर्य19:1220:04रात
शुक्र20:0420:56रात
बुध20:5621:48रात
चंद्र21:4822:39रात
शनि22:3923:31रात
गुरु23:3100:23रात
मंगल00:2301:15रात
सूर्य01:1502:07रात
शुक्र02:0702:59रात
बुध02:5903:51रात
चंद्र03:5104:42रात
शनि04:4205:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 मई 2028ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
28 मई 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 जून 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2537° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।